NEET UG 2026: देशभर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीट हासिल करना हर नीट देने वाले अभ्यर्थी का सबसे बड़ा सपना होता है। हालांकि, सीमित सीटों के लिए लाखों की संख्या में आवेदन करने वाले और परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के कारण यह मुकाबला बेहद कड़ा हो जाता है। ऐसे में परीक्षा और काउंसलिंग की प्रक्रिया के दौरान संभावित कटऑफ और 'सेफ स्कोर' की सही जानकारी होना बेहद महत्वपूर्ण है। इससे छात्रों न केवल छात्रों को अपनी रैंक का आकलन करने में मदद मिलती है, बल्कि काउंसलिंग के समय सही कॉलेज का चुनाव करने में काफी सहायता मिलती है। हाल ही में नीट यूजी 2026 के रिजल्ट जारी किए गए हैं, जिसके बाद से उम्मीदवारों की नजर काउंसलिंग प्रक्रिया पर टिकी हुई है। इस स्थिति में कई छात्रों के मन में यही सवाल घुम रहा है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट के लिए नीट का कितना स्कोर होना चाहिए?
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सरकारी कॉलेजों के लिए संभावित नीट कटऑफ और सेफ स्कोर
करियर काउंसलिंग एक्सपर्ट की मानें तो पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों और ट्रेंड्स के विशेलेषण के आधार पर ऑल इंडिया कोटा (AIQ) के तहत संभावित कटऑफ का अनुमान लगाया गया है। इसके अनुसार जनरल कैटेगरी यानी सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट पाने के लिए 560 से 563 का स्कोर एक सेफ स्कोर माना जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि जिन उम्मीदवारों के 550+ अंक है, उनके लिए भी सरकारी सीट मिलने की मजबूत संभावनाएं बनी रहेंगी।
वहीं बात करें राज्य कोटा के आधार पर सरकारी कॉलेज में प्रवेश की तो आपको बता दें कि राज्यों में कट-ऑफ थोड़ी कम रही है, क्योंकि यहां 85 प्रतिशत राज्य कोटा होता है। ऐसे में अगर आपके नीट में अंक कम भी है तो भी आफको अपने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएसस की सीट मिलने की संभावनाएं अधिक है। इसके अलावा OBC, EWS, SC और ST वर्ग के लिए संभावित कटऑफ नियमानुसार और कम रहेगी।
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क्वालीफाइंग कटऑफ में भारी बढ़ोतरी से बढ़ा मुकाबला
इस साल नीट यूजी 2026 की क्वालीफाइंग कटऑफ में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है। यही कारण है कि इस साल दाखिले की रेस और अधिक चुनौतीपूर्ण बन गई है।
| कैटेगरी | नीट 2025 कटऑफ | नीट 2026 क्वालीफाइंग कटऑफ | कितनें अंकों की वृद्धि की संभावना |
| General / EWS | 144 अंक | 213 अंक | ~69 अंक |
| OBC / SC / ST | 113 अंक | 177 अंक | ~64 अंक |
एक्सपर्ट्स की मानें तो क्वालीफाइंग मार्क्स में इतनी बड़ी बढ़ोतरी यह साफ दर्शाती है कि इस वर्ष छात्रों का ओवरऑल प्रदर्शन बेहतर रहा है, जिससे टॉप कॉलेजों की सीटों पर एडमिशन की रेस और तेज और मुश्किल हो गई है।
