भोपाल

सिंधिया के करीबियों का 'BJP' छोड़ने का सिलसिला जारी, आज एक और नेता कांग्रेस में होगा शामिल

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 26, 2023, 12:46 PM IST

Madhya Pradesh BJP: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवपुरी के भाजपा नेता रहे राकेश गुप्ता, अपने काफिले के साथ भोपाल के लिए रवाना हो चुके हैं। कुछ ही देर में वह अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल होंगे। इससे पहले बैजनाथ यादव ने भी भारतीय जनता पार्टी छोड़ दी थी।

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ज्योतिरादित्य सिंधिया

Photo : BCCL

Madhya Pradesh BJP: मध्य प्रदेश में भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य को एक और झटका लगा है। उनके करीबियों का भाजपा छोड़ने का सिलसिला जारी है। अब खबर है कि सिंधिया के करीबी नेताओं में शुमार राकेश गुप्ता ने भी भारतीय जनता पार्टी से किनारा कर लिया है। वह आज मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवपुरी के भाजपा नेता रहे राकेश गुप्ता, अपने काफिले के साथ भोपाल के लिए रवाना हो चुके हैं। कुछ ही देर में वह अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल होंगे। जाहिर है कि मध्य प्रदेश में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में सिंधिया के करीबियों का एक-एक कर साथ छोड़ना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

2020 में भाजपा में हुए थे शामिल

जानकारी के मुताबिक, राकेश गुप्ता कांग्रेस विचारधारा वाले परिवार से आते हैं। हालांकि, उन्होंने 2020 में कांग्रेस का दामन छोड़ दिया था और ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में भाजपा में शामिल हो गए थे। ऐसा माना जा रहा है कि राकेश गुप्ता का भाजपा से मोह भंग हो गया है, ऐसे में वह अपनी पुरानी पार्टी यानी कांग्रेस में शामिल होना चाहते हैं।

बैजनाथ यादव ने भी छोड़ी थी कांग्रेस

इससे पहले सिंधिया के एक और करीबी नेता रहे बैजनाथ यादव ने भी भारतीय जनता पार्टी छोड़ दी थी। उन्होंने भी अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। चुनाव से ठीक पहले मध्य प्रदेश भाजपा में मची उठापटक ने राज्य के साथ केंद्रीय नेतृत्व की भी चिंता बढ़ा दी है।

साल के आखिरी में होने हैं चुनाव

मध्य प्रदेश उन राज्यों में शुमार है, जहां इस साल के आखिरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इस राज्य के नतीजे न सिर्फ भाजपा बल्कि कांग्रेस के लिए भी अहम होंगे। दोनों ही पार्टियां यहां सत्ता हासिल करने के लिए जोरआजमाइश करती नजर आने वाली हैं। बता दें, राज्य में 2018 में हुए चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और सरकार बनाई थी। हालांकि, 2020 में सिंधिया की बगावत के बाद कमलनाथ की सरकार गिर गई थी। इस बार भी टक्कर कांग्रेस और भाजपा के बीच मानी जा रही है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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