Jabalpur News: जबलपुर हाईकोर्ट में शुक्रवार को हिंदू युवती अंकिता राठौर और हसनैन अंसारी की शादी के मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने 22 अक्टूबर को दिए सिंगल बेंच के ऑर्डर पर रोक लगा दी है। जिसके बाद इस हिंदू-मुस्लिम जोड़े की शादी अब 12 नवंबर को नहीं हो पाएगी। इस मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह के बाद होगी। युवती के परिजन भी इस शादी के विरोध में हैं। इसके अलावा हिंदूवादी संगठनों ने भी इस शादी के आवेदन जोरदार विरोध किया था।
प्रेमी युगल ने सुरक्षा की मांग के लिए लगाई याचिका
दरअसल इंदौर की अंकिता राठौर और जबलपुर के हसनैन अंसारी ने जस्टिस विशाल धगट की कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें कहा था कि 12 नवंबर को हमारी शादी तय हुई है, हमें सुरक्षा प्रदान की जाए। इस याचिका पर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई करते हुए पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए थे कि प्रेमी युगल को सुरक्षा प्रदान की जाए। कोर्ट ने आदेश में कहा था कि युवक और युवती दोनों अलग-अलग रहेंगे और एक दूसरे से संपर्क भी नहीं करेंगे। युवती के पिता ने सिंगल बेंच के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिसपर हाईकोर्ट चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैथ और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की।
विवाह के विरोध में युवती के परिजन
युवती के पिता के वकील अशोक लालवानी ने अपना पक्ष रखते हुए इस शादी के स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत आने का विरोध किया। उन्होने कोर्ट के सामने कहा कि इसके पूर्व हाइकोर्ट के जस्टिस जीएस अहलुवालिया ने धर्मांतरण के बिना हुई शादी को अवैध माना था। उन्होंने जस्टिस जीएस अहलुवालिया के पिछले आदेश का हवाला देते हुए कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट के अंतर्गत भी एक हिंदू लड़की और मुस्लिम लड़की की शादी मान्य नहीं है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में हाइकोर्ट ने यह भी पाया इस मामले को सिंगल बैंच की जगह डबल बैंच में रेफर करना था।
