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Asaram Bail: आसाराम की अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राजस्थान सरकार से मांगी हेल्थ रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से आसाराम की हेल्थ रिपोर्ट की जांच करने को कहा है, क्योंकि उन्होंने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत मांगी है।

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आसाराम (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राजस्थान सरकार से कहा कि वह खुद को भगवान बताने वाले आसाराम की सेहत के बारे में 'सही जानकारी'ले। आसाराम मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत की मांग कर रहे हैं। राजस्थान सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, 'थोड़ा खून बह रहा है... लेकिन ऐसा लगता है कि यह कुछ समय के लिए ही है,'और आसाराम दवा ले रहे हैं।

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, 'हम नहीं चाहते कि हम पर या आप पर कोई दोष मढ़ा जाए।' मेहता ने बेंच को बताया कि डॉक्टरों का कहना है कि यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराए गए आसाराम को अपनी सेहत ठीक रखने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव करने की जरूरत है।

'हम नहीं चाहते कि कोई अप्रिय घटना हो

PTI के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, 'हम नहीं चाहते कि कोई अप्रिय घटना हो।'मेहता ने कहा कि राज्य 20 जुलाई तक हलफनामा दाखिल करेगा। उसने सेहत के आधार पर अंतरिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाखिल की है। यह मामला जस्टिस MM सुंदेश और जस्टिस PB वराले की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया।

मेहता ने कोर्ट को बताया, 'गैस्ट्रो प्रॉब्लम की वजह से थोड़ी ब्लीडिंग हो रही है, लेकिन यह कुछ समय के लिए लग रहा है और आसाराम दवा ले रहे हैं।' बेंच ने जवाब दिया, 'हम बस इतना कहेंगे कि प्लीज़ सही इंस्ट्रक्शन लें क्योंकि हम नहीं चाहते कि कोई अनहोनी हो।' आसाराम की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि वह एक हाई-रिस्क पेशेंट हैं।

जब आसाराम को पिछली बार रिहा किया गया था

मेहता ने बताया कि तीन महीने पहले आसाराम अयोध्या और काशी विश्वनाथ गए थे और वे हर जगह पैदल चले थे। उस समय उन्हें इलाज के लिए अस्थायी रिहाई दी गई थी। बेंच ने इस मामले की सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख तय की है।

'उन्हें अब तक दी जा रही मेडिकल सुविधा जारी रहनी चाहिए'

30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से आसाराम की उस याचिका पर जवाब मांगा था, जिसमें उन्होंने हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने मामले में उनकी सजा और उम्रकैद को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस दौरान उन्हें अब तक दी जा रही मेडिकल सुविधा जारी रहनी चाहिए, बशर्ते संबंधित मेडिकल अथॉरिटी इससे संतुष्ट हो। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह छूट भी दी थी कि अगर उनकी हालत बिगड़ती है, तो वे इस मामले का तत्काल जिक्र कर सकते हैं।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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