भोपाल

ग्वालियर के मुस्लिम परिवार ने कराया भागवत कथा का आयोजन, धान की बंपर पैदावार के बाद हनुमान मंदिर का भी कराया जीर्णोधार

Gwalior Muslim family Bhagwat Katha News: फिरोज खान ने बताया कि उन्होंने स्थानीय लोगों से सलाह मशविरा करने के बाद मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और नदी के तट पर भव्य श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन संपन्न किया।

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ग्वालियर के मुस्लिम परिवार ने कराया भागवत कथा का आयोजन।

Photo : Times Now Digital

Gwalior Muslim family Bhagwat Katha News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक मुस्लिम परिवार द्वारा कराई गई श्रीमद् भागवत कथा इन दिनों चर्चा में है। दावा किया गया है कि धान की बंपर पैदावार होने के बाद मुस्लिम परिवार ने ना सिर्फ भागवत कथा कराई, बल्कि हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार भी कराया है। इसके बाद से इस मुस्लिम परिवार की सनातन धर्म में गहरी आस्था चर्चा का विषय बनी हुई है।

जानकारी के मुताबिक, ग्वालियर के देहात स्थित भितरवार कस्बे के वार्ड नंबर 15 से सफीना फिरोफ खान निर्दलीय पार्षद हैं। सफिना के पति फिरोज खान पेशे से किसान हैं और बचपन से हनुमान भक्त हैं। फिरोज खान का दावा है कि इस बार 70 -80 लाख रुपए की धान की बंपर पैदावार हुई है। जिसके बाद पति -पत्नी दोनों ने एक राय होकर श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन करना तय किया। इतना ही नहीं भितरवार में पार्वती नदी के तट पर स्थित शाशन हनुमान मंदिर का भी जीर्णोधार कराया। यह मंदिर जीर्णशीर्ण हालत में था।

सनातन संस्कृति से जुड़ा हुआ है परिवार

फिरोज खान ने बताया कि उन्होंने स्थानीय लोगों से सलाह मशविरा करने के बाद मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और नदी के तट पर भव्य श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन संपन्न किया। फिरोज का कहना है कि बप्पा की प्रेरणा से ये संभव हो सका। कथा का वाचन सुप्रसिद्ध कथावाचक डॉ श्याम सुंदर पाराशर शास्त्री ने किया। वहीं इस श्रीमद भागवत कथा स्थानीय ग्रामीणों ने कंधे से कंधा मिलाकर फिरोज का सहयोग किया। स्थानीय ग्रामीण बंटी गुर्जर का कहना है कि मुस्लिम परिवार द्वारा करवाई जा रही श्रीमद भागवत कथा का आयोजन बेहद सौहार्द पूर्ण माहौल में कराया गया है। पार्वती नदी के तट पर गोलेश्वर महादेव मंदिर के समीप आयोजित भागवत कथा हिंदू- मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक है। ये परिवार शुरू से ही सनातन हिंदू संस्कृति से जुड़ा है। पहले हनुमान जी के मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और सामाजिक कार्यों में ये बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और हिंदू संस्कृति के प्रति इनका बेहद लगाव है। हिंदू और मुस्लिम क्म्यूनिटी, दोनों ही भाईचारे के साथ मिलकर सहयोग कर रहे हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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