भोपाल

ग्वालियर-भोपाल इंटरसिटी और इस एक्सप्रेस ट्रेन में अब 3 स्लीपर कोच, इस दिन से मिलेगी सेवा

रेल प्रशासन ने ग्वालियर-भोपाल इंटरसिटी एक्सप्रेस (12197/12198) और ग्वालियर-प्रयागराज एक्सप्रेस (11801/11802) में एक-एक अतिरिक्त स्लीपर कोच स्थायी रूप से जोड़ने का निर्णय लिया है। इस बदलाव के बाद, इन दोनों ट्रेनों में स्लीपर कोच की कुल संख्या तीन हो जाएगी।

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ट्रेन (फोटो-Istock)

भोपाल : रेल प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा का ख्याल रखते हुए ग्वालियर-भोपाल इंटरसिटी एक्सप्रेस (12197/12198) और ग्वालियर-प्रयागराज एक्सप्रेस (11801/11802) में एक-एक अतिरिक्त स्लीपर कोच स्थायी रूप से जोड़ने का फैसला लिया है। यह बदलाव 19 जुलाई 2025 से चरणबद्ध तरीके से लागू होगा। गाड़ी संख्या 12198 ग्वालियर–भोपाल इंटरसिटी एक्सप्रेस में 19 जुलाई से और वापसी गाड़ी 12197 भोपाल–ग्वालियर इंटरसिटी एक्सप्रेस में भी इसी दिन से यह परिवर्तन प्रभावी होगा।

रिजर्वेशन में मिलेगी राहत

दैनिक भास्कर की खबर के हवाले से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गाड़ी संख्या 11801 ग्वालियर–प्रयागराज एक्सप्रेस में 20 जुलाई से और वापसी गाड़ी 11802 प्रयागराज–ग्वालियर एक्सप्रेस में 21 जुलाई से स्लीपर कोच जोड़ा जाएगा। इन परिवर्तनों के बाद, इन गाड़ियों में कुल 19 ICF कोच होंगे, जिससे अधिक यात्रियों को सीट मिल सकेगी और रिजर्वेशन में भी राहत मिलेगी। रेलवे प्रशासन ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती संख्या और सुविधाओं की आवश्यकता को देखते हुए समय-समय पर कोच वृद्धि जैसी व्यवस्थाएं की जाती रहेंगी।

यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले आरक्षण की स्थिति की जांच करें और निर्धारित समय से पहले स्टेशन पहुंचें। यह निर्णय विशेष रूप से ग्वालियर, भोपाल, प्रयागराज और मध्य मार्ग के यात्रियों के लिए लाभकारी होगा, जो लंबे समय से अतिरिक्त कोच की मांग कर रहे थे।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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