भोपाल

पटौदी परिवार पर लटकी तलवार! 15 हजार करोड़ की संपत्ति से धोना पड़ सकता है हाथ; जानें क्या है मामला

मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है। सैफ अली खान के परिवार की 15 हजार करोड़ की संपत्ति पर सरकार का कब्जा हो सकता है। बता दें कि यह मामला शत्रु संपत्ति अधिनियम से जुड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सैफ अली खान और उनके परिवार को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए 30 दिन का समय दिया था। लेकिन परिवार ने इस समय के भीतर कोई दावा पेश नहीं किया।

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फाइल फोटो।

Photo : PTI

Bhopal News: सैफ अली खान, उनकी मां शर्मिला टैगोर और परिवार की 15,000 करोड़ रुपये की संपत्ति पर सरकार के कब्ज़े का रास्ता साफ होता दिख रहा है। भोपाल के कोहेफिज़ा से लेकर चिकलोद तक फैली यह संपत्ति अब सरकारी अधिग्रहण के दायरे में आ सकती है। यह संपत्ति पटौदी परिवार की ऐतिहासिक भोपाल रियासत की जमीन का हिस्सा है, जिस पर 2015 से अदालत का स्टे लागू था।

कोर्ट ने दिया था 30 दिनों का वक्त

आपको बता दें कि इस ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा, करीब 100 एकड़, अब तक डेढ़ लाख लोगों की बसाहट का केंद्र बन चुका है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस संपत्ति को "शत्रु संपत्ति" मानते हुए, सैफ अली खान, शर्मिला टैगोर, सोहा अली खान, सबा अली खान और उनकी बुआ सबीहा सुल्तान को अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष पक्ष रखने का आदेश दिया था। कोर्ट ने परिवार को 30 दिनों का समय दिया था, जो अब समाप्त हो चुका है।

परिवार ने नहीं किया दावा पेश

हाई कोर्ट द्वारा दी गई एक माह की मियाद समाप्त होने के बाद भी पटौदी परिवार ने प्राधिकरण के समक्ष अपना दावा पेश नहीं किया है। अब यह संपत्ति सरकार के कब्ज़े में जा सकती है।

क्या होता है शत्रु संपत्ति?

शत्रु संपत्ति उस संपत्ति को कहते हैं जो भारत-पाकिस्तान विभाजन या भारत-चीन युद्ध के दौरान उन नागरिकों के नाम पर रह गई थी, जिन्होंने भारत की नागरिकता छोड़ दी थी। बता दें कि पटौदी परिवार के पास अब केवल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में चुनौती देने का विकल्प बचा है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो सरकार इस संपत्ति को जब्त कर सकती है।

Makarand Kale
मकरंद कालेauthor

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।\nततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि\n\nसाल 2008 में by chance journalist बना। 2013 से by choice journalist हूं। कहते हैं ना कि अच्छे काम में पहले बहुत परेशानियां आती हैं। और बाद में उसी की आदत पड़ जाती है।

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