भोपाल

JCB से हो रही थी खुदाई, फिर जमीन के अंदर दिखा ऐसा कमरा; गुप्त रास्तों ने चौंकाया!

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में एक मकान की नींव की खुदाई करते समय एक कमरा मिला है। उसके अंदर कई गुप्त रास्तों का भी पता चला है। हालांकि, यह कमरा कितना पुराना है, इसका पता नहीं चला है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसका निर्माण कई वर्षों पहले किया गया होगा।

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एमपी में मिली प्राचीन इमारत

बुरहानपुर : जिले के राजपुरा क्षेत्र में मकान निर्माण के लिए नींव खुदाई के दौरान एक प्राचीन कालीन इमारत का पता चला है। देखने से पता चला है कि यह इमारत अंदर से कई गुप्त रास्तों को भी जोड़ती है। उसमें अनाज भंडारण कक्ष भी बना हुआ है। साथ ही पुराने जमाने के दीवार अलमीरा भी बना हुआ है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह इमारत नुमा जगह कई वर्षों पहले निर्मित की गई होगी। आगे खुदाई से पता चलेगा अभी और कितने रहस्य जुड़े हैं। इससे जुड़ा वीडियो भी सामने आया है।

बुरहानपुर के राजपुरा जड़िया वाड़ी क्षेत्र का मामला है। खुदाई में कमरानुमा जगह मिलने से स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से लोग उसे देखने के लिए पहुंच रहे हैं। फिलहाल, मकान मालिक ने जेसीबी से मिट्टी डालकर बंद कर दिया है। कमरा निकलने पर निगम के अफसर जांच करवाने की बात कह रहे हैं। मकान मालिक आनंद भगत का कहना है कि उन्होंने घर बनाने के लिए जेसीबी का सहारा लिया था। खुदाई के दौरान कमरा निकलना आश्चर्च वाली बात है। शायद पहले के जमाने में अनाज रखने के लिए ऐसे भंडारण कक्ष बनाए गए होंगे।

इतिहास के जानकारों के अनुसार बुरहानपुर एक प्राचीन शहर है। यहां अक्सर जमीन के खुदाई के दौरान कमरे और गुप्त रास्ते निकलते हैं। विगत कुछ दिनों पहले भी असीरगढ़ में खुदाई के दौरान सोने के सिक्के निकालने की अफवाह फैली थी। बुरहानपुर के आजाद नगर में मुगलकालीन अनाज का गोदाम भी निकाला था। इससे जुड़ी हकीकत क्या है ये पुरात्तव विभाग ही बता पाएगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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