भोपाल

MP के कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए 5 चीते, नामीबिया की ज्वाला करेगी अठखेलियां; संख्या हुई इतनी

मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में पांच नए चीते छोड़े गए हैं। इससे जंगल में चीतों की कुल संख्या 12 हो गई है, जबकि 14 अभी भी बाड़ों में हैं।

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(फाइल फोटो)

श्योपुर: जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में शुक्रवार को पांच चीतों को जंगल में छोड़ा गया। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावकों को उनके बाड़ों से जंगल में छोड़ दिया गया। ज्वाला को नामीबिया से केएनपी लाया गया था। इससे जंगल में चीतों की कुल संख्या 12 हो गई है, जबकि 14 अभी भी बाड़ों में हैं।

बयान में कहा गया कि इससे पहले सात चीतों को जंगल में छोड़ा गया था, जिनमें दो नर चीते और बराबर संख्या में मादा तथा चार शावक शामिल थे। इसके अनुसार पांच चीते पांच फरवरी को छोड़े गये थे जबकि दो अन्य दिसंबर में छोड़े गये थे। केएनपी में अब 26 चीते हैं जिनमें से आठ दक्षिण अफ्रीका से, चार नामीबिया से तथा 14 भारतीय धरती पर जन्मे शावक शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कही थी ये बात

पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने कहा कि था देखकर बेहद खुशी हो रही है कि एशिया से विलुप्त हो चुके चीते मध्यप्रदेश में अपना कुनबा बढ़ा रहे हैं। चीता वीरा के दो शावकों ने जन्म लिया है। केएनपी में अब 14 शावकों सहित 26 चीते हैं। इससे पहले पिछले साल दिसंबर में, चीता वायु और अग्नि को उनके बड़े बाड़ों से जंगल में छोड़ा गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर, 2022 को आठ नामीबियाई चीतों - पांच मादा और तीन नर - को केएनपी के बाड़ों में छोड़ा था। यह शिकार और आवास के नुकसान के कारण भारत में चीतों के विलुप्त होने के सात दशक बाद दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय चीतों का स्थानांतरण था।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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