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अपने आप में किसी शहर से कम नहीं है भारत का सबसे बड़ा मंदिर, खूबसूरती मन मोह लेगी

भारत अपनी समृद्ध धार्मिक परंपराओं और भव्य मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में खास पहचान रखता है। देशभर में ऐसे कई प्राचीन मंदिर हैं, जो आस्था के साथ-साथ अपनी विशालता और अद्भुत स्थापत्य के लिए भी प्रसिद्ध हैं। इन्हीं में एक मंदिर ऐसा है जिसे भारत का सबसे बड़ा मंदिर परिसर माना जाता है, जिसके बारे में जानना बेहद रोचक है।

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यहां है भारत का सबसे बड़ा मंदिर

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Largest Temple in India: भारत अपनी समृद्ध धार्मिक विरासत और भव्य मंदिर स्थापत्य के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। देश के लगभग हर राज्य और शहर में ऐसे प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जो न सिर्फ आस्था का केंद्र हैं बल्कि इतिहास और संस्कृति की अनमोल धरोहर भी माने जाते हैं। कई मंदिर अपने विशाल परिसर, ऊंचे गोपुरम, अद्भुत नक्काशी और सदियों पुरानी परंपराओं के कारण खास पहचान रखते हैं। इन्हीं में से एक मंदिर ऐसा भी है जिसे भारत का सबसे बड़ा मंदिर या परिसर माना जाता है। यह दक्षिण भारत के एक ऐतिहासिक शहर में स्थित है और इसका परिसर कई किलोमीटर तक फैला हुआ है। ऐसे में आइए बिना देर किए इस दिलचस्प मंदिर के बारे में जानते हैं।

Largest Temple in India

भारत का सबसे बड़ा मंदिर

भारत का सबसे बड़ा मंदिर

भारत का सबसे बड़ा मंदिर परिसर फिलहाल तमिलनाडु में स्थित है जो कि श्री रंगनाथस्वामी मंदिर है। तिरुचिरापल्ली शहर में श्रीरंगम नामक एक द्वीप पर बना हुआ है, जो कावेरी नदी के बीच में स्थित है। यह भव्य मंदिर भगवान रंगनाथ यानी भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी विशालता के लिए प्रसिद्ध है। इसका निर्माण पारंपरिक द्रविड़ स्थापत्य शैली में किया गया है, जिसमें ऊंचे गोपुरम, विशाल प्रांगण और कई मंडप देखने को मिलते हैं।

इतने एकड़ में फैला है मंदिर

इस मंदिर परिसर की सबसे खास बात यह है कि इसके भीतर कई छोटे-बड़े मंदिर भी बने हुए हैं, जो इसे एक विशाल धार्मिक परिसर का रूप देते हैं। मंदिर की वेबसाइट के अनुसार, यह पूरा मंदिर लगभग 156 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यदि इसके पूरे परिसर की परिधि की बात करें तो यह लगभग चार किलोमीटर तक फैली मानी जाती है। मंदिर का मुख्य गोपुरम करीब 236 फीट ऊंचा बताया जाता है, जो इसे और भी भव्य बनाता है।

Srirangam Ranganathaswamy Temple Tamil Nadu

श्रीरंगम रंगनाथस्वामी मंदिर, तमिलनाडु

कब और किसने बनवाया था मंदिर?

यह मंदिर 1000 साल से भी पुराना माना जाता है और आज भी इसमें पूजा-पाठ की प्राचीन परंपरा जारी है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, चोल राजा धर्मवर्मा ने पौराणिक काल (संगम काल के आसपास) में कराया था, जिसे बाद में कावेरी नदी की बाढ़ के बाद प्रारंभिक चोल राजाओं ने पुनः निर्मित किया। सदियों तक चोल, पांड्य, होयसला और विजयनगर राजाओं ने 10वीं से 17वीं शताब्दी के बीच इसका विस्तार किया। वहीं इस मंदिर को मुगल आक्रमणों ने भी कई बार नुकसान पहुंचा, लेकिन हर बार इसे फिर से सजाया और संजोया गया।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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