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RD Group फैमिली विवाद : SC ने उत्तरा बब्बर को एडवोकेट कमिश्नर बनाने का दिया सुझाव, समझौते को अमल में लाने की कवायद

उत्तरा बब्बर की सुविधा और सहमति के बारे में पता करने को कहा है कि क्या वह इस कवायद को करने के लिए तैयार हैं, ताकि 5 फरवरी के मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट को प्रभावी किया जा सके।

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सुप्रीम कोर्ट (फोटोःIstock)

दिल्ली : अरडी ग्रुप से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने समझौते को लागू कराने की दिशा में अहम कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता उत्तरा बब्बर को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किए जाने का प्रस्ताव रखा है। उन्हें पहले से इस प्रक्रिया में कुछ हद तक काम कर चुके एडवोकेट कमिश्नर की सहायता से आगे की कवायद करने का प्रस्ताव है। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान यह सुझाव दिया। कोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस सुझाव पर सहमति जताई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब मुद्दा 5 फरवरी 2026 को हुए मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट के क्लॉज 8 से संबंधित है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को वरिष्ठ अधिवक्ता उत्तरा बब्बर की सुविधा और सहमति के बारे में पता करने को कहा है कि क्या वह इस कवायद को करने के लिए तैयार हैं, ताकि 5 फरवरी के मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट को प्रभावी किया जा सके। कोर्ट ने मामले को मुख्य मामले के साथ 6 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के लिए लिस्ट करने का निर्देश दिया है।

क्या है रियल स्टेट से जुड़े अरडी ग्रुप विवाद?

दिवंगत रियल एस्टेट कारोबारी अशोक वर्मा के परिवार में उनकी संपत्तियों, कंपनियों और कारोबारी हितों के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। उनकी बेटियों शेफाली वर्मा और शिबानी वर्मा कपूर समेत परिवार के सदस्यों के बीच संपत्तियों और कारोबारी अधिकारों को लेकर कई कानूनी कार्यवाहियां हुईं। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद कोर्ट की निगरानी में मध्यस्थता कराई गई। 5 फरवरी 2026 को पक्षों ने मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट पर हस्ताक्षर कर प्रमुख विवादों को सुलझा लिया।

कैसे शुरू हुआ परिवार का विवाद?

अरडी ग्रुप के संस्थापक अशोक वर्मा के निधन के बाद परिवार की संपत्तियों, कंपनियों में हिस्सेदारी और कारोबारी हितों के बंटवारे को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच विवाद सामने आया। इस विवाद में अशोक वर्मा की बेटियों शेफाली वर्मा और शिबानी वर्मा कपूर समेत परिवार के अन्य सदस्य शामिल रहे।

विवाद केवल किसी एक प्रॉपर्टी तक सीमित नहीं था। परिवार की अलग-अलग संपत्तियों, जमीनों और कारोबारी हितों को लेकर अधिकार और बंटवारे के सवाल उठे और मामला अलग-अलग कानूनी कार्यवाहियों के जरिए अदालतों तक पहुंचा।

अरडी ग्रुप की शुरुआत 1971 में दिवंगत अशोक वर्मा ने की थी। ग्रुप मुख्य रूप से रियल एस्टेट डेवलपमेंट से जुड़ा रहा है और इसका कारोबार रेजिडेंशियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल प्रोजेक्ट्स तक फैला है। ग्रुप की अपनी जानकारी के मुताबिक, पांच दशक से ज्यादा समय से यह शहरी विकास और रियल एस्टेट क्षेत्र में काम कर रहा है।

दिल्ली-एनसीआर में अरडी नाम से कई प्रमुख प्रोजेक्ट जुड़े रहे हैं। इनमें गोपाल दास भवन और विजया बिल्डिंग, दिल्ली के बाराखंभा रोड पर स्थित प्रमुख कमर्शियल प्रॉपर्टीज हैं। वहीं गुरुग्राम में अरडी सिटी, अरडी मॉल, पाम ग्रोव विला, पाम ग्रोव हाइट्स, प्लैटिनम ग्रीन्स और प्लैटिनम कोर्ट्स जैसे प्रोजेक्ट्स का नाम मिलता है।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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