बीमारी अक्सर सिर्फ शारीरिक दर्द नहीं लाती, बल्कि परिवारों के लिए आर्थिक संकट भी खड़ा कर देती है। अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आते ही कई घरों में उधार, गहने गिरवी रखने और जीवनभर की बचत खत्म होने का डर भी सताने लगता है। लेकिन पंजाब में ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ से लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
यह योजना राज्य के लोगों को भरोसा दिला रही है कि गंभीर बीमारी का इलाज अब आर्थिक तबाही का कारण नहीं बनेगा। पंजाब की भगवंत मान सरकार की इस योजना के तहत पंजाब के सभी वास्तविक निवासियों, मध्यम वर्गीय परिवारों, सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को प्रति परिवार हर साल 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति सिर्फ पैसों की कमी के कारण इलाज से वंचित न रहे। योजना के तहत जटिल सर्जरी, हृदय रोग इलाज, डायलिसिस, नवजात शिशु देखभाल और गंभीर बीमारियों का इलाज शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री सेहत योजना अपडेटेड हेल्थ बेनिफिट पैकेज 2.2 फ्रेमवर्क के तहत संचालित की जा रही है। इसमें लगभग 2,300 हेल्थ पैकेज शामिल हैं और 839 सरकारी व सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इसकी सुविधा उपलब्ध है। साथ ही 98 विशेष उपचार पैकेज सिर्फ सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित किए गए हैं।
योजना का असर अब जमीन पर भी दिखने लगा है। 16 मई तक 1.59 लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है और 3.11 लाख से ज्यादा मेडिकल प्रक्रियाएं पूरी हुई हैं। अब तक 522 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता दी जा चुकी है। इन आंकड़ों के पीछे हजारों परिवारों की राहत की कहानियां भी छिपी हैं। बड़ी बात ये है कि किसी किसान को इलाज के लिए जमीन नहीं बेचनी पड़ी, तो किसी बच्चे का उपचार समय पर शुरू हो सका।
पंजाब के लुधियाना, पटियाला और जालंधर जैसे जिलों में योजना को लेकर तेजी से जागरुकता बढ़ी है। अब तक 43 लाख से ज्यादा हेल्थ कार्ड जारी हो चुके हैं। योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी आसान प्रक्रिया है। लोग कॉमन सर्विस सेंटर, सरकारी अस्पतालों, जिला कार्यालयों और विशेष शिविरों में आधार और वोटर कार्ड जैसे सामान्य दस्तावेजों के जरिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।
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