Anand Bangladeshi Woman Case: आणंद जिले में एक बांग्लादेशी महिला के अवैध रूप से भारत में रहने के मामले ने मानवीय और कानूनी दोनों पहलुओं को लेकर चर्चा छेड़ दी है। पुलिस ने बांग्लादेश मूल की एक महिला को अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में गिरफ्तार कर उसके प्रत्यर्पण (डिपोर्टेशन) की प्रक्रिया शुरू की है। वहीं, महिला के पति और बच्चों ने सरकार से उसे भारत में रहने की अनुमति देने और नागरिकता प्रदान करने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, आणंद जिले के लंबहवेल गांव निवासी तरुणकुमार बंसीभाई पटेल की पहचान करीब 15 वर्ष पहले फेसबुक के जरिए बांग्लादेश निवासी काजुली नामक युवती से हुई थी। समय के साथ दोनों के बीच मित्रता प्रेम संबंध में बदल गई। परिवार के सदस्यों के अनुसार, दोनों विवाह करना चाहते थे और साथ जीवन बिताने का निर्णय ले चुके थे।
पासपोर्ट बनवाने की कोशिश
बताया गया है कि काजुली ने भारत आने के लिए पासपोर्ट बनवाने का प्रयास किया था, लेकिन कथित रूप से एजेंट की धोखाधड़ी के कारण उसे दस्तावेज नहीं मिल सके। इसी बीच उसके परिवार की ओर से अन्यत्र विवाह का दबाव बढ़ने लगा। इसके बाद वर्ष 2016 में वह कथित रूप से अवैध रूप से सीमा पार कर भारत पहुंची और आणंद में तरुणकुमार के साथ रहने लगी। परिवार के मुताबिक, भारत आने के बाद दोनों ने हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह किया। काजुली ने हिंदू धर्म अपनाने के बाद अपना नाम काजल रखा। दंपती के दो बच्चे हैं, जिनमें एक आठ वर्षीय पुत्र और एक दो वर्षीय पुत्र शामिल हैं।
परिवार का क्या है दावा?
परिवार का दावा है कि काजल पिछले कई सालों से स्थानीय समाज और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप जीवन व्यतीत कर रही थी। मामला उस समय सामने आया जब राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए चलाए जा रहे अभियान के दौरान पुलिस को उसके बारे में जानकारी मिली। बताया जाता है कि काजल ने बांग्लादेश में रह रही अपनी बीमार मां से संपर्क किया था। जांच के दौरान पुलिस को उसके भारत में बिना वैध दस्तावेजों के रहने की जानकारी मिली। इसके बाद आणंद एलसीबी ने 2 जून की रात उसे हिरासत में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। फिलहाल महिला को नारीगृह में रखा गया है और उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जारी है।
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मामले पर विचार करने की अपील की
दूसरी ओर, महिला के पति तरुण पटेल ने सरकार से मानवीय आधार पर मामले पर विचार करने की अपील की है। उनका कहना है कि उनकी पत्नी किसी आपराधिक उद्देश्य से भारत नहीं आई थी, बल्कि दोनों ने पारिवारिक जीवन स्थापित किया है और उनके दो छोटे बच्चे हैं। परिवार का दावा है कि बांग्लादेश भेजे जाने की स्थिति में महिला को सामाजिक और व्यक्तिगत स्तर पर गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। परिवार ने राज्य और केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि बच्चों के हितों और पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। वहीं, मामले में अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सरकारी नियमों के अनुसार लिया जाएगा।
