अयोध्या राम मंदिर कथित चंदा चोरी (Ram Mandir Donation Row) मामला आजकल हर किसी की जुबां पर है। राम मंदिर में चढ़ावा अनियमितता मामले को कई लोग सिर्फ घोटाला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास पर चोट बता रहे हैं। इस मामले में लगातार कार्रवाई जारी है। एक के बाद एक घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। कल यानी गुरुवार 2 जुलाई को वकीलों ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर FIR की मांग करते हुए विरोध मार्च निकाला। इसी बहाने देश के अन्य मंदिरों में भी चढ़ावे की सुरक्षा और उसके उपयोग को लेकर बातचीत होने लगी है। इस बीच श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर कमेटी (BKTC) ने चंदे और दान को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में इन दिनों वार्षिक चारधाम यात्रा जारी है। हर साल की तरह इस बार भी बड़ा संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आ रहे हैं। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के अलावा भी श्रद्धालु पंच बदरी और पंच केदार की यात्रा करते हैं। जब श्रद्धालु किसी भी मंदिर में जाते हैं तो अपनी अपार श्रद्धा दर्शाते हुए न सिर्फ नतमस्तक होते हैं, बल्कि अराध्य के सामने कुछ द्रव्य (रुपये, सोना-चांदी) आदि दान भी चढ़ाते हैं। अयोध्या राम मंदिर कथित चंदा चोरी मामले से सबक लेते हुए श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर (BKTC) ने अपने अधीन आने वाले सभी मंदिरों में दान, चढ़ावे और अन्य आय के प्रबंधन को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।
BKTC ने दान-चढ़ावे की गिनती को लेकर किया सावधान
BKTC ने साफ किया है कि दान और चढ़ावे के कलेक्शन, सुरक्षित रखरखाव तथा अकाउंटिंग की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह की शिकायत या वित्तीय अनियमितता की गुंजाइश न रहे। कल यानी गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को जारी आदेश में समिति के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़ ने बदरीनाथ, केदारनाथ और समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में दान-चढ़ावा गणना केंद्र, अकाउंट्स ब्रांच, ट्रेजरी, गेस्ट हाउस और पूजा काउंटर पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को खास सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।
किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं
BKTC के आदेश में कहा गया है कि नकद दान, चढ़ावे में प्राप्त सामग्री या मंदिर की किसी भी आय के मैनेजमेंट में लापरवाही या अनियमितता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी संबंधित कर्मचारियों को निर्धारित नियमों और वित्तीय प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें - Ram Mandir Trust: 'सरकार नहीं कर सकती हस्तक्षेप, ट्रस्ट है स्वतंत्र निकाय', गृह मंत्रालय ने CIC को क्या-क्या बताया?
47 मंदिरों का संचालन करता है BKTC
गौरतलब है कि BKTC उत्तराखंड में 47 मंदिरों का प्रबंधन संभालता है। इन 47 मंदिरों में श्री केदारनाथ मंदिर (रुद्रप्रयाग) भी है, जो भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। श्री बदरीनाथ मंदिर (चमोली) का प्रबंधन भी BKTC ही संभालता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है और देश के चार धामों (बदरीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम) में से एक है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें - 'यह सिर्फ घोटाला नहीं, करोड़ों भक्तों के विश्वास पर चोट', राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पृथ्वीराज चव्हाण ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
ये प्रमुख मंदिर भी BKTC के अंतर्गत आते हैं
इन दो प्रमुख मंदिरों के अलावा BKTC जोशीमठ में नरसिंह मंदिर का प्रबंधन भी संभालता है, जो भगवान बदरी विशाल की शीतकालीन गद्दी है। उखीमठ में ओंकारेश्वर मंदिर भी BKTC के अंतर्गत आता है, जो भगवान केदरनाथ की शीतकालीन गद्दी है। इनके अलावा निम्न प्रमुख मंदिर भी BKTC के अंतर्गत आते हैं -
- जोशीमठ में वासुदेव मंदिर
- कर्णप्रयाग में आदि बद्री मंदिर समूह
- जोशीमठ के पास पांडुकेश्वर मंदिर
- भविष्य बदरी
- वृद्ध बदरी
- ध्यान बदरी
- योग बदरी
- तुंगनाथ मंदिर
- मदमहेश्वर
- श्री विश्वनाथ जी (गुप्तकाशी)
- गौरी माई मंदिर (गौरीकुंड)
- त्रिजुगीनारायण मंदिर
समिति का मानना है कि पारदर्शी व्यवस्था से श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा। यही नहीं मंदिरों के वित्तीय प्रबंधन में जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। अयोध्या राम मंदिर कथित चंदा चोरी मामले में मैनेजमेंट पर उठे उठे सवालों के बीच BKTC का यह कदम मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
