Ayodhya Old Name: रणबीर कपूर स्टारर रामायणम् (Ramayana) फिल्म इन दिनों खूब चर्चा में है। गौरतलब है कि, इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभाएंगे। रामायण सिर्फ भगवान राम की जीवन यात्रा का वृतांत नहीं बल्कि युगों से चली आ रही एक ऐसी परंपरा है, जो समय-समय पर और भी निखरती गई है। इससे मिलने वाली सीख कई महान व्यक्तियों के जीवन का आधार बनी हैं। गोस्वामी तुलसीदास रामचरितमानस में लिखते हैं कि- हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥ रामचंद्र के चरित सुहाए। कलप कोटि लगि जाहिं न गाए॥ यानी हरि अनंत हैं (उनका कोई पार नहीं पा सकता) और उनकी कथा भी अनंत है। सब संत लोग उसे बहुत प्रकार से कहते-सुनते हैं। रामचंद्र के सुंदर चरित्र करोड़ों कल्पों में भी गाए नहीं जा सकते। रामायण काल का सबसे अहम भाग है वह नगरी जहां भगवान राम ने जन्म लिया। सरयू नदी के किनारे बसी अयोध्या (Ayodhya) नगरी आज विश्वभर में लोकप्रिय है। लेकिन क्या आपने यह सोचा है कि रामायण काल से पहले इस शहर का नाम क्या था या किसने इसे बसाया? अगर नहीं तो आइए जानें।

राम मंदिर, अयोध्या
प्राचीन ग्रंथों में अयोध्या का उल्लेख
पुराणों, रामायण और अन्य प्राचीन ग्रंथों में अयोध्या का जिक्र मिलता है। महर्षि वाल्मीकि ने रामायाण में और गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में अयोध्या को भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में वर्णित किया है। वहीं कुछ ऐतिहासिक संदर्भों में अयोध्या की स्थापना लगभग 2200 ईसा पूर्व मानी जाती है। हिंदू परंपराओं के अनुसार, अयोध्या की स्थापना का श्रेय भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र मनु को दिया जाता है।
किसने बसाई थी अयोध्या नगरी?
ऐसा माना जाता है कि सतयुग में इस नगरी की स्थापना मनु द्वारा की गई थी। मनु के दस पुत्रों में से इक्ष्वाकु वंश ने अयोध्या पर शासन किया, और आगे चलकर इसी वंश में भगवान राम का जन्म हुआ। इसके अतिरिक्त अयोध्या पर हरिश्चंद्र, पृथु, मांधाता, सागर, भगीरथ, दिलीप और दशरथ जैसे अनेक विख्यात राजाओं ने भी शासन किया।
यह था अयोध्या का पुराना नाम
अयोध्या को प्राचीन समय में ‘साकेत’ नाम से जाना जाता था। स्कंद पुराण में भी इस नगरी का वर्णन मिलता है, जहां ‘अयोध्या’ शब्द का अर्थ ऐसा स्थान बताया गया है जहां युद्ध न हो। अयोध्या को ‘अवध’ क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है, और ‘अवध’ का आशय है वह जगह जहां किसी प्रकार का वध न होता हो। कहा जाता है कि अयोध्या ऐसी नगरी थी जिसे युद्ध के माध्यम से जीतना संभव नहीं था। बौद्ध ग्रंथ में भी इसे ‘साकेत’ नाम से वर्णित किया गया है। वहीं महान संस्कृत कवि कालिदास ने अपनी रचनाओं में ‘साकेत’ और ‘अयोध्या’ दोनों नामों का इस्तेमाल किया है। आज अयोध्या में लाखों लोग राम मंदिर में रामलला के दर्शन करने के लिए आते हैं।
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