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मध्य प्रदेश में पशु क्रूरता, उफनती नदी में 50 गायों को फेंका, 15-20 की मौत

मध्य प्रदेश के सतना में एक समूह ने कुछ गायों को उफनाती नदी में फेंक दिया। इस घटना में 15 से 20 गायों की मौत हो गई है, लेकिन अभी तक इस सूचना की पुष्टि नहीं हो पाई है।

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(प्रतिकात्मक फोटो)

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

सतना: मध्यप्रदेश के सतना जिले में एक समूह द्वारा कुछ गायों को उफनती नदी में फेंके जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आया है, जिसके बाद पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक खबरों के अनुसार, नागौद पुलिस थाने की सीमा के अंतर्गत मंगलवार को हुई इस घटना में 15 से 20 गायों की मौत हो गई है, लेकिन अभी तक इस सूचना की पुष्टि नहीं हो पाई है।

सतना नदी में गायों फेंका

नागौद पुलिस थाने के प्रभारी अशोक पांडे ने बताया कि मंगलवार की शाम को बमहोर के पास रेलवे पुल के नीचे कुछ लोगों द्वारा गायों को सतना नदी में फेंके जाने का एक वीडियो सामने आया। इस पर संज्ञान लेते हुए एक पुलिस दल को मौके पर भेजा गया, और फिर मामला दर्ज किया गया। चार लोगों की पहचान बेटा बागरी, रवि बागरी, रामपाल चौधरी और राजलू चौधरी के रूप में की गई है। इन पर मध्य प्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

यह कानून राज्य में गायों की हत्या को रोकता है। साथ ही, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पांडे ने बताया कि घटना मंगलवार की दोपहर में हुई। उन्होंने बताया, "शुरुआती जानकारी के अनुसार, करीब 50 गायें थीं और उनमें से 15 से 20 की मौत हो गई। बचाव अभियान जारी है। पांडे ने बताया कि नदी में फेंकी गई गायों की सही संख्या और उनकी मौत का पता जांच के बाद ही चलेगा। पुलिस ने बताया कि जांच और आरोपियों की तलाश की जा रही है।

(इनपुट-भाषा)

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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