Punjab News: आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब से सांसद और वरिष्ठ नेता गुरमीत सिंह मीत हेयर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पिछले एक दशक से अधिक समय से भाजपा देशभर में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के लिए एक तय रणनीति पर काम कर रही है। उनका कहना है कि जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं, भाजपा विपक्षी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों जैसे ईडी और सीबीआई का दबाव बनाकर उन्हें डराने या फिर अपने पक्ष में करने की कोशिश करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब की पहचान संघर्ष और सिद्धांतों से जुड़ी रही है, इसलिए यहां भाजपा का कथित “वॉशिंग मशीन” मॉडल कामयाब नहीं होगा।
"अब भाजपा के साथ नजर आते हैं"
मीत हेयर ने विभिन्न राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा कि असम में हेमंत विश्व शर्मा पर कांग्रेस में रहते हुए जांच एजेंसियों की कार्रवाई हुई, लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी छवि बदल गई। इसी तरह महाराष्ट्र में अजीत पवार पर गंभीर आरोप लगाए गए, मगर भाजपा में आने के बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री पद दिया गया। उन्होंने संसद का जिक्र करते हुए कहा कि आज वहां भी कई ऐसे नेता हैं जो पहले विपक्ष में थे और अब भाजपा के साथ नजर आते हैं, जबकि पुराने कार्यकर्ताओं को पीछे कर दिया गया है। पंजाब में भी भाजपा बैठकों में पुराने कार्यकर्ताओं की जगह अन्य दलों से आए चेहरे अधिक दिखाई दे रहे हैं।
राघव चड्डा पर भी साधा निशाना
मीत हेयर ने राघव चड्ढा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पार्टी और नेतृत्व ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई, उसी पार्टी के कठिन दौर में उनका दूर रहना उचित नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पार्टी के बड़े नेता जेल में थे और कार्यकर्ता आंदोलन कर रहे थे, उस समय चड्ढा विदेश में थे। इससे उनकी भूमिका को लेकर संदेह पैदा होता है। उन्होंने यह भी कहा कि केजरीवाल को राहत मिलने के बाद भी चड्ढा की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
AAP को तोड़ने का कोशिश
पंजाब में हाल ही में आप से जुड़े कुछ नेताओं के घरों पर हुई छापेमारी का जिक्र करते हुए मीत हेयर ने कहा कि यह भी उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए पार्टी को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उनका आरोप है कि केंद्रीय नेतृत्व दबाव बनाकर AAP को तोड़ने का प्रयास कर रहा है, लेकिन पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने दिल्ली के उदाहरण देते हुए कहा कि कई नेताओं को ऑफर दिए गए, लेकिन उन्होंने झुकने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना।
डर और दबाव की राजनीति का पंजाब में असर
अंत में उन्होंने पंजाब के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि यहां के लोग कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं। उन्होंने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि डर और दबाव की राजनीति का पंजाब में अलग असर होगा। उनके मुताबिक, यहां की जनता और नेता ऐसी चुनौतियों से घबराने वाले नहीं हैं और भविष्य में इसका राजनीतिक परिणाम भाजपा को भुगतना पड़ सकता है।
