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'सपा ने 5 सीट नहीं, 50 जिले जीते हैं', 'वो छह सीट ‘छल’ से जीते हैं : MLC रिजल्ट-AIIMS गोरखपुर पर अखिलेश ने कसा तंज

उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव (शिक्षक-स्नातक एमएलसी चुनाव) में सपा के खाते में पांच सीटें आई हैं। इस रिजल्ट से गदगद अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने 'पांच सीटें नहीं बल्कि 50 जिले' जीते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने 'छह सीटे छल से जीती हैं'।

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव (फोटो-@yadavakhilesh)

लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद के शिक्षक-स्नातक एमएलसी चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की एकजुटता की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि इन चुनावों में सपा के खाते में पांच सीटें आई हैं और पीडीए का जनाधार बढ़कर 95 प्रतिशत हो गया है। अखिलेश ने इस जीत के लिए पार्टी प्रत्याशियों, कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और मतदाताओं का आभार जताया। साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की नीतियों पर निशाना साधा।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि इस चुनाव में ब्राह्मण, व्यापारी और कायस्थ समाज के लोगों ने भी सपा प्रत्याशियों को वोट दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हर समाज के लोगों को परेशान और अपमानित किया है, जिसके चलते अलग-अलग वर्गों के लोग एकजुट हुए हैं। उनके मुताबिक, यह नतीजा भाजपा की शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ जनादेश है।

बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बीजेपी पर हमला

सपा प्रमुख ने कहा कि शिक्षकों और युवाओं ने बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़ी समस्याओं के खिलाफ मतदान किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में शिक्षकों को स्कूलों के काम के अलावा चुनावी ड्यूटी जैसे अतिरिक्त काम भी करने पड़ रहे हैं। अखिलेश ने स्कूलों को बंद किए जाने के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा।

उन्होंने महिला शिक्षकों का विशेष तौर पर आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव में सपा प्रत्याशियों का समर्थन किया। अखिलेश ने यह भी दावा किया कि कई पत्रकारों ने चुनाव के दौरान निष्पक्ष रिपोर्टिंग की और इसके लिए उन्होंने उनका धन्यवाद किया।

'हम पांच सीट नहीं, 50 जिले जीते हैं'

अखिलेश यादव ने चुनाव नतीजों को लेकर कहा, ''दरअसल हम 5 सीट नहीं, 50 जिले जीते हैं।'' उन्होंने भाजपा और उसके सहयोगी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि वे छह सीटें छल से जीते, जबकि सपा ने जनबल के दम पर जीत दर्ज की है। उन्होंने दावा किया कि इन नतीजों से भाजपा के कई राजनीतिक गढ़ कमजोर हुए हैं।

सपा प्रमुख ने बुलडोजर और भाजपा के चुनावी प्रदर्शन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एमएलसी चुनाव में जनता ने बुलडोजर को पार्किंग में खड़ा कर दिया है और 2027 के विधानसभा चुनाव में उसे म्यूजियम में भेज देगी। अखिलेश ने भरोसा जताया कि विधान परिषद चुनाव के नतीजे 2027 में सपा की सरकार बनाने की नींव तैयार करेंगे। उन्होंने कहा, ''हम चौबीस-छब्बीस जीते हैं, हम सत्ताइस भी जीतेंगे।''

AIIMS गोरखपुर को लेकर भी अखिलेश ने उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में गोरखपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की चिकित्सा सुविधाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने संस्थान की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता को इलाज के लिए निजी अस्पताल में स्थानांतरित किए जाने की खबर का जिक्र करते हुए लिखा, ''भाजपा राज में AIIMS को भी इलाज की जरूरत है। सच में यही अंधेर नगरी वाला राज है, बाकी सवा दो करोड़ प्रतिदिन का झूठा प्रचार है।''

दरअसल, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, डॉ. विभा दत्ता अपने आवास पर अचानक बेहोश हो गई थीं। इसके बाद उन्हें एम्स गोरखपुर की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। कुछ समय उपचार के बाद उन्हें एम्बुलेंस से शहर के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। फिलहाल उनकी तबीयत स्थिर बताई जा रही है और वह अपने नियमित कामकाज पर लौट आई हैं।

इस घटनाक्रम के बाद अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जिस संस्थान में पूर्वांचल और बिहार समेत दूसरे क्षेत्रों से मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, उसकी कार्यकारी निदेशक को निजी अस्पताल में क्यों जाना पड़ा। उन्होंने एम्स गोरखपुर में कैथ लैब जैसी सुविधाओं को लेकर भी सवाल खड़े किए।

हालांकि, डॉ. विभा दत्ता को निजी अस्पताल में शिफ्ट किए जाने की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। इस मामले में एम्स प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में निजी अस्पताल में इलाज कराए जाने को संस्थान की चिकित्सा सुविधाओं की कमी का प्रमाण मानना फिलहाल उचित नहीं होगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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