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गटर का पानी, मिनरल वॉटर और शीशा बंद... मीडिया के सवालों से भागते दिखे आकाश विजयवर्गीय

देश के ‘सबसे स्वच्छ शहर’ कहे जाने वाले इंदौर में साफ पानी की हकीकत ने सिस्टम के दावों की पोल खोल दी है। भगीरथपुरा इलाके में दूषित और सीवर मिले पानी से हुई मौतों के बाद जब गुस्साई जनता जवाब मांग रही है, तब जिम्मेदारों के प्रतिनिधि सवालों से बचते नजर आ रहे हैं। टाइम्स नाउ नवभारत के कैमरे के सामने पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय का सवालों से भागना न सिर्फ प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सत्ता और आम जनता के बीच बुनियादी जरूरतों तक को लेकर कितनी गहरी खाई बन चुकी है।

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मीडिया के सवालों से बचते दिखे आकाश विजयवर्गीय

Photo : Times Now Digital

हिंदी के कवि दुष्यंत कुमार ने लिखा था- कहां तो तय था चरागां हर एक घर के लिए, कहां चराग मयस्सर नहीं शहर के लिए... लाचार-पंगु सिस्टम पर सवाल करतीं इन पंक्तियों में जिन बुनियादी चीजों की बात हो रही है, वो शायद पानी से कुछ ऊपर ही होंगी। पानी और हवा से भला क्या बुनियादी होगा। देश के 'सबसे साफ शहर' में ऐसी साफ पानी तक मयस्सर नहीं है। इंदौर का भगीरथपुरा इलाका, जो पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में है, वहां लोग मल वाले बैक्टिरिया का पानी पीने को मजबूर थे और प्रशासन को सुध तब आई, जब एक के बाद एक कई लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे। अब दूषित पेयजल से लोगों की मौत के बाद गुस्से में उबली जनता सवाल पूछ रही है, तो जवाब देने के बजाय नेता भागते नजर आ रहे हैं। इसी मामले में कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय से जब टाइम्स नाउ नवभारत ने भागीरथपुरा में जहरीले पानी और मौतों को लेकर सवाल किए, तो वे कैमरे और माइक से बचते दिखे। सवालों से घिरने पर उन्होंने बिना जवाब दिए वहां से निकलना मुनासिब समझा।

सवालों से बचते रहे, शीशा चढ़ाकर निकल गए

टाइम्स नाउ नवभारत की टीम लगातार आकाश विजयवर्गीय से यह सवाल पूछती रही कि भागीरथपुरा की जनता गटर मिला पानी पीने को मजबूर क्यों है। लेकिन आकाश विजयवर्गीय न तो रुके, न ही किसी सवाल का जवाब दिया। आखिरकार उन्होंने गाड़ी का शीशा चढ़ाया और मौके से निकल गए। यह वही आकाश विजयवर्गीय हैं, जो कभी एक अधिकारी पर बल्ले से हमला करने के मामले में सुर्खियों में रहे थे, लेकिन अब जनता और मीडिया के सवालों का सामना करने से बचते नजर आ रहे हैं।

गटर का पानी जनता को, मिनरल वॉटर नेताओं को?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कॉलोनी में लंबे समय से सीवर के पानी की आपूर्ति हो रही थी, जिसकी शिकायतें प्रशासन को दी गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जहरीला पानी पीने से 15 लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद हालात यह हैं कि जनता को टैंकरों से ऐसा पानी दिया जा रहा है, जिसे खुद प्रशासन उबालकर पीने की सलाह दे रहा है। वहीं, नेताओं और अधिकारियों के सामने बैठकों में मिनरल वॉटर की बोतलें रखी जा रही हैं। सवाल उठता है कि क्या साफ पानी सिर्फ सत्ता में बैठे लोगों का हक है?

मौतों के बाद भी बदइंतजामी, जवाबदेही से दूरी

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दोषियों पर कार्रवाई की बात जरूर कही है, लेकिन ग्राउंड पर हालात नहीं बदले हैं। भागीरथपुरा में लोग डर के साये में जी रहे हैं और पानी उबालकर पीने को मजबूर हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की टीम जब इलाके में पहुंची तो प्रशासन की बदइंतजामी साफ नजर आई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर आज लोगों को पीने का साफ पानी तक नहीं दे पा रहा है। आम जनता टैक्स देती है ताकि उसे साफ पानी, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। लेकिन जब इन्हीं बुनियादी जरूरतों पर सवाल उठते हैं, तो जवाब देने के बजाय नेता गाड़ी का शीशा चढ़ाकर निकल जाते हैं।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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