आगरा

Agra में वैलेंटाइन डे पर दुबके प्रेमी जोड़े, अश्लीलता पर हिंदू संगठनों ने मचाई हाय तौबा; जलाए...

आगरा में वैलेंटाइन डे के खिलाफ हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतले फूंके। कार्यकर्ताओं ने इस दिन से जुड़ी अश्लीलता के खिलाफ विरोध जताया।

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(फाइल फोटो)

आगरा: अखिल भारत हिंदू महासभा समेत कई हिंदू संगठनों ने वैलेंटाइन डे के विरोध में शुक्रवार को आगरा की सड़कों पर एवं पार्कों में प्रदर्शन किया तथा पुतला जलाया। कार्यकर्ताओं ने वैलेंटाइन डे को "पश्चिमी सभ्यता थोपे जाने" के रूप में वर्णित करते हुए इसका विरोध किया और विरोध के प्रतीक के रूप में इसका पुतला जलाया। हिंदू संगठनों का यह विरोध प्रदर्शन सुभाष पार्क से शुरू हुआ, जहां विरोध के प्रतीक के तौर पर ‘वैलेंटाइन डे’ का पुतला जलाया गया। इसके बाद, कार्यकर्ताओं ने इस दिन से जुड़ी "अश्लीलता" के खिलाफ विरोध जताया।

पश्चिमी संस्कृतियों से उधार लिया गया उत्सव है वेलेंटाइन डे

प्रदर्शनकारियों में से कुछ के हाथों में लाठियां थीं और वे शहर भर के विभिन्न पार्कों में गये। अखिल भारत हिंदू महासभा के जिला अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "वेलेंटाइन डे पश्चिमी संस्कृतियों से उधार लिया गया उत्सव है, जिसका हमारी सभ्यता में कोई स्थान नहीं है। इस दिन पार्क अभद्रता के केंद्र बन जाते हैं। हम ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं करेंगे और ऐसा करने वालों को सबक सिखाएंगे।

गाजियाबाद में प्रेमी जोड़ों को धमकाया

इसी तरह गाजियाबाद पुलिस ने हिंदू संगठन से जुड़े विपिन गुर्जर और उनके साथियों के खिलाफ स्वर्ण जयंती पार्क में युवकों को धमकाने के मामले में मुकदमा दर्ज किया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए केस दर्ज किया और मामले की जांच शुरू की। यह वीडियो 12 फरवरी का है, जिसमें कुछ लोग लाठी-डंडों से लैश होकर पार्क में बैठे लोगों को धमकाते हुए नजर आ रहे हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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