आगरा

Agra News : खुदाई के दौरान प्रकट हुई श‍िव-पार्वती की मूर्ति, बुलडोजर से टक्‍कर के बाद भी प्रतिमा सुरक्षित

Agra News : उत्‍तरप्रदेश के आगरा में खुदाई के दौरान एक प्राचीन मूर्ति निकली। इसके निकलने के बाद ग्रामीणों ने पुरातत्‍व विभाग को जानकारी दी। टीम की ओर से नीरज कुमार वर्मा, नरेंद्र सिंह राणा और जितेंद्र सिंह वहां पर पहुंचे।

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बुल्‍डोजर से खोदाई के वक्‍त निकली मूर्ति। (सांकेतिक फोटो)

Photo : BCCL

Agra News : यूपी के आगरा में खुदाई के दौरान एक ऐसा वाकया हुआ जिसे देख वहां मौजूद हर शख्‍स अचंभित हो गया। दरअसल, मलपुरा कस्बे के कबूलपुर गांव में मकान का निर्माण कार्य चल रहा है। इसी क्रम में वहां पर खोदाई का काम शुरू किया गया और थोड़ी देर बाद पत्‍थरों के बीच से प्राचीन प्रतिमा निकली। प्रतिमा को देख सब कोई हैरान था। उसके बाद स्‍थानीय लोगों के द्वारा पुरातत्व विभाग को सूचना दी गई। विभाग की तीन सदस्यीय टीम ने मूर्ति की गहनता से जांच की। टीम ने बताया कि खुदाई के दौरान जो मूर्ति निकली है वह शिव-पार्वती की है और प्रतिमा 18वीं सदी की प्रतीत होती है।

कैसे मिली मूर्ति

कबूलपुर गांव के रहने वाले भगवान दास के खेत पर उनके मकान का निर्माण चल रहा है। रविवार शाम करीब छह बजे वहां पर मौजूद मजदूर और बुलडोजर खुदाई करने में लगे हुए थे। तभी अचानक से एक पत्‍थर के टुकड़ की टक्‍कर बुलडोजर से हो गई और भगवानदास ने पत्‍थर को निकालने की कोशिश की तो ये एक प्राचीन प्रतिमा निकली। धीरे-धीरे ये खबर गांव में आग की तरह फैल गई और मूर्ति को देखने लिए सैकड़ों की संख्‍या में लोगों की भीड़ जुटने लगी। खेत पर पहुंचने के बाद प्रतिमा के पास ग्रामीणों ने पुरातत्‍व विभाग को बुलाया और जब उन्‍होंने इसे शिव-पार्वती की मूर्ति बताया तो उन्‍होंने भजन-कीर्तन शुरू कर दिया, मूर्ति की आरती उतारी गई।

राजस्‍थान के खास पत्‍थर से बनी है मूर्ति

खुदाई के दौरान निकली मूर्ति की जांच करने पहुंची टीम में नीरज कुमार वर्मा, नरेंद्र सिंह राणा और जितेंद्र सिंह शामिल थे। उनका कहना है कि काफी ज्‍यादा समय तक पानी और नमी के बीच रहने के कारण प्रतिमा पर क्षरण के निशान आ गए हैं। बताया गया है क‍ि मूर्ति जिस पत्‍थर से बनी है वह राजस्थान में ही पाया जाता है और उसे बफ स्टोन के नाम से जाना जाता है।

चर्चाओं का बाजार हुआ गर्म

शिव-पार्वती की मूर्ति मिलने के बाद गांव में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। ग्रामीणों में इस बात की चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि उस स्‍थान से कुछ देर वाणगंगा नामक नदी थी, मूर्ति संभवत: उसी में रही होगी। हालांकि जानकारी करने पर पता चला कि वाणगंगा नदी अब अस्तित्‍व में नहीं है। अब स्‍थानीय लोगों ने कहा है कि जहां मूर्ति निकली है वहां पर मंदिर का निर्माण कराया जाएगा।

क्‍या कहते हैं अधिकारी

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के जो अधिकारी मौके पर मूर्ति की जांच करने के लिए पहुंचे उन्‍होंने बताया कि प्रतिमा शिव-पार्वती की है। नमी और पानी की वजह से मूर्ति का काफी क्षरण हो चुका है। जिसके कारण उसमें बनी कलाकृतियां स्पष्ट नहीं दिख रहीं। हालांकि उत्खनन टीम को गांव में भेजा गया है और प्रतिमा की जांच कराई जा रही है।
Shaswat Gupta
शाश्वत गुप्ता author

पत्रकारिता जगत में पांच साल पूरे होने जा रहे हैं। वर्ष 2018-20 में जागरण इंस्‍टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्‍युनिकेशन से Advance PG डिप्लोमा करने के... और देखें

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