वृंदावन के प्रसिद्ध श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर का ख़ज़ाना आज शनिवार को 54 साल बाद खो गया है, खज़ाने के खुलने को लेकर तमाम तैयारियां की गईं थी। मंदिर प्रांगण में सुरक्षा के इंतज़ाम किए गए हैं। दरअसल, बांके बिहारी जहां विराजमान होते हैं, वहीं पर ये तोशखाना बना है। बताया जाता है कि तहखाना में करोड़ों रुपये का खजाना मौजूद है। आज जब तोशखाना खुलेगा तो ख़ज़ाने का राज़ भी खुलेगा।
54 साल से बंद इस खजाने के कमरे के रहस्यों से पर्दा उठ सकता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, 'तोष खाना' खोलने का निर्णय 29 सितंबर को लिया गया था। शनिवार दोपहर को मंदिर के दर्शन बंद होने के बाद यह कमरा खोला जाएगा। मंदिर परिसर में जगह-जगह पोस्टर लगाकर इसकी सूचना दी गई है।
पिछले 54 साल से बंद इस कमरे में सोने-चांदी के आभूषण, प्राचीन शस्त्र और अन्य कीमती वस्तुओं के होने की संभावना को लेकर भक्तों और स्थानीय लोगों में उत्सुकता चरम पर है। माना जा रहा है कि इस कमरे में मंदिर के ऐतिहासिक खजाने का भंडार हो सकता है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी ने किसी भी गोस्वामी को इस प्रक्रिया में शामिल होने या खजाने की सूची बनाने की अनुमति नहीं दी है। कमेटी की देखरेख में यह पूरी कार्रवाई संपन्न होगी।
'तोष खाना' के खुलने से बांके बिहारी मंदिर के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ेगा। यह प्रक्रिया न सिर्फ मंदिर की धरोहर को उजागर करेगी, बल्कि सालों से बंद इस कमरे के रहस्यों को भी दुनिया के सामने लाएगी। ठाकुर बांके बिहारी मंदिर पूरे भारत के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह मंदिर मथुरा जिले के वृंदावन धाम में रमण रेती क्षेत्र में स्थित है और भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह रूप 'बांके बिहारी' को समर्पित है।
इस मंदिर का निर्माण सन् 1864 में स्वामी हरिदास ने कराया था, जो भक्त कवि और संगीतकार होने के साथ-साथ प्रसिद्ध संत भी थे। कहा जाता है कि स्वामी हरिदास को भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी ने 'बांके बिहारी' के रूप में स्वयं दर्शन दिए थे। उसी स्थान पर इस मंदिर की स्थापना की गई।
