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7 साल की लड़की एक पैर पर 400 मीटर दौड़कर जाती है स्कूल, भावुक अपील-'DM अंकल, मुझे एक ट्राइसाइकिल दे दीजिए...'

उत्तर प्रदेश के बलिया में एक 7 साल की लड़की रोजाना 400 मीटर दौड़कर स्कूल जाती है। जब उसका पढ़ाई जारी रखने का पक्का इरादा वायरल हुआ, तो अधिकारियों को इस मामले में दखल देना पड़ा।

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'DM अंकल, मुझे एक ट्राइसाइकिल दे दीजिए, मैं उससे स्कूल जाऊंगी'

कुछ लोगों के लिए स्कूल तक '400 मीटर' पैदल चलना कोई बड़ी बात नहीं हो सकती- लेकिन उत्तर प्रदेश में बलिया की एक 7 साल की बच्ची के लिए, यही 400 मीटर की दूरी तय करना किसी बुरे सपने से कम नहीं है, जिसका सामना वह हर सुबह करती है-सिर्फ़ अपने स्कूल पहुंचने और अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए।

यह बच्ची एक पैर पर लगभग 400 मीटर तक फुदककर चलती है-ताकि वह अपने स्कूल पहुंच सके। कभी-कभी थककर और रोते हुए बैठ जाने के बावजूद, यह रोजाना का सफर उन सबसे बड़े कामों में से एक है जिसे वह हर दिन पूरा करती है।

बलिया जिला प्रशासन से मिली ट्राइसाइकिल

सोशल मीडिया पर इस बच्ची का एक वीडियो वायरल हुआ था। हालांकि, उसके दिल को छू लेने वाले वीडियो के बदले में उसे सिर्फ सहानुभूति और शुभकामनाएं ही नहीं मिलीं-बल्कि बलिया जिला प्रशासन से बहुत जरूरी मदद और सहायता भी मिली और मिली ट्राइसाइकिल, बुधवार, 2 सितंबर को प्रशासन ने उससे संपर्क किया और ट्राइसाइकिल, किताबें, स्कूल बैग, खिलौने और चॉकलेट दिए। साथ ही, मेडिकल मदद और उसके गांव तक जाने वाली सड़क को बेहतर बनाने का वादा भी किया।

पहली कक्षा की छात्रा रागिनी का एक पैर बुरी तरह खराब हो गया

मैनियर इलाके के रानीपुर गांव की पहली कक्षा की छात्रा रागिनी का एक पैर बुरी तरह खराब हो गया है। उसे अपने घर से सिर्फ़ 400 मीटर दूर डिघेड़ा प्राइमरी स्कूल तक जाने के लिए मुश्किल सफर तय करना पड़ता है।

दूसरे बच्चों को स्कूल बैग ले जाते हुए देखती है तो अक्सर रोने लगती है

रागिनी की मां बबीता देवी ने बताया कि छह महीने की उम्र में एक हादसे में उनकी बेटी का पैर बुरी तरह घायल हो गया था। कई जगहों पर इलाज के बावजूद पैर को बचाया नहीं जा सका, और परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के कारण वे बेहतर इलाज नहीं करवा पाए। बबीता ने कहा कि जब रागिनी दूसरे बच्चों को स्कूल बैग ले जाते हुए देखती है तो अक्सर रोने लगती है और अपनी मां से कहती है कि वह भी पढ़ना चाहती है। कभी-कभी परिवार के सदस्य उसे स्कूल छोड़ देते हैं, तो कभी-कभी वह एक पैर पर फुदककर स्कूल जाती है।

स्कूल तक का सफ़र तय करना मुश्किल

हेडमास्टर अजीत पाल ने कहा कि रागिनी का खराब पैर उसके लिए स्कूल तक का सफर तय करना मुश्किल बना देता है। वीडियो सामने आने के बाद, DM मंगला प्रसाद सिंह ने मंगलवार को दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी और एक डॉक्टर को रागिनी की हालत का जायजा लेने के लिए भेजा। बुधवार को उन्होंने अधिकारियों के साथ रागिनी के घर का दौरा किया और उसकी मां व दादा से बात की।

'प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि रागिनी की पढ़ाई में कोई रुकावट न आए'

सिंह ने बताया कि प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि रागिनी की पढ़ाई में कोई रुकावट न आए और उसे सरकार से मिलने वाली सभी जरूरी मदद मिले। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि उसकी मेडिकल जांच हो और कहा कि उसके पैर के सही इलाज के लिए कोशिशें की जाएंगी। DM ने गांव की सड़क की खराब हालत का भी जायजा लिया और अधिकारियों को जल्द से जल्द उसकी मरम्मत करने का निर्देश दिया।प्रशासन ने रागिनी के परिवार को यह भी बताया कि उनके घर पर शौचालय बनवाने के लिए फंड मंजूर कर दिया गया है।

AAP सांसद संजय सिंह ने भी रागिनी को ट्राईसाइकिल उपहार में दी

वहीं AAP सांसद संजय सिंह के निर्देश पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी गांव पहुंचकर रागिनी को ट्राईसाइकिल उपहार में दी। इसके साथ ही परिवार को 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है और रागिनी के लिए कृत्रिम पैर बनवाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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