Hal Chhath Vrat Paran 2026: हलछठ यानी हल षष्ठी का व्रत इस साल 2 सितंबर 2026 को रखा जा रहा है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई और शेषनाग के अवतार माने जाने वाले भगवान बलराम जी के जन्मदिन के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। बलराम जी का प्रमुख अस्त्र हल है, इसी वजह से इस पर्व को हल षष्ठी कहा जाता है। संतान की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं।
हलछठ को कई जगह हरछठ, ललही छठ और हल षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में भोजन के नियम सामान्य व्रतों से अलग होते हैं। खासतौर पर हल से जुती जमीन में पैदा होने वाले अन्न का सेवन नहीं किया जाता। यही वजह है कि तिन्नी या पसही के चावल, महुआ और भैंस के दूध-दही जैसी चीजों का पारण में विशेष महत्व माना जाता है। आइए जानते हैं कि हलछठ व्रत का पारण कब और कैसे करें।
हलछठ व्रत का पारण कब होगा
साल 2026 में हलछठ का व्रत 2 सितंबर को रखा जा रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार इस दिन चंद्रोदय रात 9 बजकर 45 मिनट पर होगा। जिन परिवारों में हलछठ का व्रत चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य के बाद खोलने की परंपरा है, वहां चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पारण किया जाएगा।
हालांकि हलछठ के पारण को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में परंपराओं का अंतर मिलता है। कई परिवारों में चंद्र दर्शन के बाद महुआ और भैंस के दूध से बनी दही आदि ग्रहण करके व्रत खोला जाता है, जबकि अन्न का सेवन सप्तमी तिथि में किया जाता है। इस साल भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 3 सितंबर 2026 को है। ऐसे में जिन घरों में अन्न का पारण सप्तमी के दिन किया जाता है, वहां 3 सितंबर को परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत का अन्न ग्रहण किया जाएगा।
भगवान बलराम की पूजा के बाद करें पारण
हलछठ के दिन शाम की पूजा में हरछठ माता की पूजा के साथ भगवान बलराम की पूजा की जाती है। इस दौरान पूजा, कथा और आरती पूरी करने के बाद चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं। चंद्रमा को जल और कच्चे दूध से अर्घ्य देने के बाद संतान की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करें। इसके बाद व्रत खोलने की प्रक्रिया शुरू होती है।
हलछठ के पारण में सबसे पहले क्या खाएं
हलछठ की पारंपरिक मान्यता के अनुसार सामान्य भोजन से पारण नहीं किया जाता है। कई क्षेत्रों में सबसे पहले महुआ और भैंस के दूध से बने दही को ग्रहण किया जाता है। इस दौरान सेंधा नमक का यूज किया जाता है। कुछ जगह महुआ को घी में भूनकर भी खाया जाता है। इसे पलाश यानी ढाक के पत्ते पर रखकर ग्रहण किया जाता है। इसके बाद परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार तिन्नी या पसही के चावल सहित अन्य मान्य खाद्य पदार्थ लिए जाते हैं।
सप्तमी को लें अन्न
हलछठ व्रत के अन्न अगले दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को लिया जाएगा। जहां चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद महुआ और भैंस के दही से पारण किया जाता है, वहां भी सामान्य अन्न का सेवन सप्तमी तिथि में किया जाता है। साल 2026 में सप्तमी 3 सितंबर को है। इस कारण सप्तमी तिथि को ही अन्न ग्रहण करें।
हलछठ के पारण में क्या खाएं
क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार इन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। पारण में आप तिन्नी या पसही का चावल, महुआ, घी में भुना हुआ महुआ और मखाने, भैंस के दूध से बनी दही, भैंस का दूध, भैंस का घी, लें। पारण की सामग्री स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में तिन्नी या पसही के चावल और महुआ का विशेष इस्तेमाल किया जाता है।
इन चीजों से बचें
हलछठ के व्रत में हल से जुती जमीन से पैदा होने वाले अन्न से बचने की परंपरा है। ऐसे में सामान्य गेहूं, चावल, दाल और हल से उगाई गई दूसरी फसलों को पारण में शामिल नहीं किया जाता है।इसी तरह दूध-दही में भी गाय के दूध की जगह भैंस के दूध और उससे बनी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है।
