कारोबार शुरू करने के लिए बड़े निवेश और बड़ी पूंजी की जरूरत होती है, ऐसा अक्सर माना जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में ऐसी कई कहानियां देखने को मिल रही हैं, जहां सरकारी ऋण सहायता से लोगों ने छोटे स्तर पर कारोबार शुरू किया और धीरे-धीरे उसे बाजार तक पहुंचाया। खास बात यह है कि इन कारोबारों ने सिर्फ उद्यमियों को आत्मनिर्भर नहीं बनाया, बल्कि दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार किए हैं।
ऐसी ही कहानी गोरखपुर के रमेश और उनकी पत्नी रीना की है। दोनों ने 'मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना' के तहत करीब 4.90 लाख रुपये का ऋण लेकर गाय के गोबर और प्राकृतिक सामग्रियों से पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद बनाने का कारोबार शुरू किया। उनके ब्रांड का नाम 'सत्यवती' है। रमेश और रीना ने गोबर से धूप-स्टिक, धूप-कोण, समरानी कप और इको-फ्रेंडली दीये बनाना शुरू किया। छोटे स्तर से शुरू हुआ यह कारोबार धीरे-धीरे गोरखपुर से बाहर निकला और आज दिल्ली, हरियाणा समेत दूसरे बाजारों तक पहुंच चुका है। उनके बनाए सुगंधित दीयों की कीमत करीब 10 रुपये प्रति पीस है।
इस कारोबार की एक और खास बात रोजगार से जुड़ी है। रमेश और रीना के साथ अब करीब 6-7 स्थानीय लोग भी काम कर रहे हैं। यानी सरकारी सहायता से शुरू हुआ एक छोटा कारोबार धीरे-धीरे दूसरे परिवारों की आय का जरिया भी बना।
प्रकृति और विज्ञान का संगम: लखनऊ का 'Soil Concept'
लखनऊ की एक बायोटेक्नोलॉजिस्ट की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। पौधों और औषधीय वनस्पतियों के अध्ययन और प्रशिक्षण के आधार पर उन्होंने वर्ष 2023 में 'सोल कांसेप्ट' (Soil Concept) ब्रांड शुरू किया। कंपनी प्राकृतिक और पौधों पर आधारित पर्सनल केयर, स्किनकेयर और हेयरकेयर उत्पाद तैयार करती है।
'मुख्यमंत्री युवा योजना' के तहत मिले ऋण ने कारोबार के मैन्युफैक्चरिंग सेटअप को विस्तार देने में मदद की। गुणवत्ता और प्राकृतिक उत्पादों पर फोकस के चलते कंपनी को ऐसे ग्राहक मिले जो दोबारा भी उसके उत्पाद खरीद रहे हैं। आज लखनऊ से संचालित इस कारोबार में 7-8 स्थानीय लोगों को रोजगार मिला हुआ है। डिस्ट्रीब्यूटर्स और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए मुंबई, गोवा, दिल्ली और जयपुर जैसे शहरों में इसके उत्पाद पहुंच रहे हैं। कंपनी के अनुसार, कारोबार ने करीब 50 लाख रुपये का वार्षिक टर्नओवर हासिल किया है।
इटावा से नोएडा पहुंचे ब्रज मोहन बने उद्यमी
इटावा के रहने वाले ब्रज मोहन कुशवाहा ने नोएडा के सेक्टर-80 में 'सुगम लाइटिंग टेक्नोलॉजी' नाम से अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की। उनके ब्रांड 'मेगस लाइटिंग' के तहत इंडोर और आउटडोर लाइटिंग उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
कंपनी बल्ब, कंसील्ड लाइट्स और फॉल्स सीलिंग में इस्तेमाल होने वाली अलग-अलग तरह की लाइट्स बनाती है। इसके अलावा कंपनी अपने ब्रांड के साथ OEM और फ्रेंचाइजी मॉडल पर भी काम करती है। आज इस कारोबार में करीब 20 लोग काम कर रहे हैं, जिनमें 3-4 महिलाएं भी शामिल हैं। कंपनी के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में उत्पादों की सप्लाई के साथ उसका वार्षिक टर्नओवर 2 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है।
ट्रेड शो में दिखी छोटे कारोबार की तस्वीर
इन कहानियों में कारोबार अलग-अलग हैं, कहीं गोबर से पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद बन रहे हैं, कहीं पौधों से पर्सनल केयर प्रोडक्ट और कहीं नोएडा में लाइटिंग की मैन्युफैक्चरिंग हो रही है। लेकिन इन उद्यमियों की कहानियों में एक समानता है, छोटे स्तर से शुरुआत, सरकारी ऋण सहायता और धीरे-धीरे बाजार का विस्तार। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में ऐसे कई उद्यमी अपने उत्पादों और कारोबार की कहानी लेकर पहुंचे हैं। इनकी सफलता यह भी दिखाती है कि सरकारी वित्तीय सहायता का इस्तेमाल केवल कारोबार शुरू करने तक सीमित नहीं है। सही बिजनेस आइडिया, मेहनत और बाजार की समझ के साथ यही मदद रोजगार पैदा करने वाले उद्यम में भी बदल सकती है।
