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विदेशी निवेशक क्या अब नहीं रुकेंगे? मार्च में निकाले 1.14 लाख करोड़, जानें क्या मिल रहा संकेत

FPI Data: इस महीने का एक कारोबारी सत्र अभी बचा है, जिससे निकासी का आंकड़ा और बढ़ सकता है। इससे पहले अक्टूबर, 2024 में एफपीआई ने एक महीने में सबसे अधिक 94,017 करोड़ रुपये की निकासी की थी।

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शेयर बाजार

भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमने का नाम नहीं ले रही है। ईरान संकट के कारण यह और तेज हो गई है। मार्केट डेटा के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में अब तक घरेलू शेयर बाजार से 1.14 लाख करोड़ रुपये (लगभग 12.3 अरब डॉलर) निकाले हैं। यह एफपीआई की भारतीय बाजार से सबसे बड़ी मासिक निकासी है। पश्चिम एशिया संघर्ष, कमजोर होता रुपया और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारत की वृद्धि पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर विदेशी निवेशक आशंकित हैं, जिससे वजह से वे बिकवाली कर रहे हैं।

अभी यह आंकड़ा बढ़ने की संभावना

इस महीने का एक कारोबारी सत्र अभी बचा है, जिससे निकासी का आंकड़ा और बढ़ सकता है। इससे पहले अक्टूबर, 2024 में एफपीआई ने एक महीने में सबसे अधिक 94,017 करोड़ रुपये की निकासी की थी। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, इसके साथ ही एफपीआई 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 1.27 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, 27 मार्च तक एफपीआई ने 1,13,380 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं।इससे पहले फरवरी में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो 17 माह का उच्चस्तर है।

इस कारण पैसा निकाल रहे विदेशी निवेशक

बाजार भागीदारों का कहना है कि एफपीआई वैश्विक आर्थिक प्रतिकूल परिस्थितियों और बढ़ी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते बिकवाल बने हुए हैं। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी, रुपये में लगातार गिरावट, खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीय द्वारा भेजे जाने वाले धन में कमी की आशंका और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के भारत की वृद्धि और कंपनियों के लाभ पर असर पड़ने की चिंता के चलते एफपीआई बिकवाली कर रहे हैं।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि इसके अलावा अमेरिका में ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल और वैश्विक स्तर पर तरलता की स्थिति सख्त होने के चलते भी एफपीआई बिकवाल बने हुए हैं। इससे उनके लिए विकसित बाजार अधिक आकर्षक हो गए हैं।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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