Home Loan EMI vs Tenure: घर खरीदने के लिए ज्यादातर लोग होम लोन (Home Loan) का सहारा लेते हैं। लेकिन लोन लेने के बाद जब ब्याज दर घटती है, आय बढ़ती है या बैंक से रीसेट का विकल्प मिलता है तो एक बड़ा सवाल यही सामने आता है कि Home Loan की EMI कम करानी चाहिए या लोन की अवधि यानी Tenure घटानी चाहिए?
दरअसल, दोनों विकल्पों का असर अलग-अलग होता है और सही विकल्प आपकी आर्थिक स्थिति, मासिक आय और भविष्य की वित्तीय जरूरतों पर निर्भर करता है।
कब कौन-सा विकल्प चुनें
अगर आपका लक्ष्य कुल ब्याज का बोझ कम करना और जल्दी कर्ज से मुक्त होना है, तो आम तौर पर Home Loan की अवधि कम करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। वहीं, अगर आपकी मासिक आय पर पहले से ज्यादा खर्च हैं या हर महीने कैश फ्लो को बेहतर रखना चाहते हैं, तो EMI कम करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
Tenure कम करने का क्या फायदा?
Home Loan में ब्याज की गणना बकाया मूलधन और लागू ब्याज दर के आधार पर होती है। अगर आप EMI को लगभग समान रखते हुए लोन की अवधि कम कर देते हैं, तो आप कम समय तक ब्याज चुकाते हैं। इसका सीधा फायदा यह होता है कि लोन की कुल ब्याज लागत कम हो सकती है।
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 20 साल के लिए Home Loan लिया है। कुछ वर्षों बाद उसकी आय बढ़ जाती है और वह पहले जितनी EMI आसानी से चुका सकता है। ऐसी स्थिति में EMI कम कराने के बजाय मौजूदा EMI बनाए रखते हुए Tenure घटाना समझदारी हो सकती है। इससे वह लोन जल्दी खत्म कर सकता है और भविष्य में बड़ी रकम ब्याज के रूप में बचा सकता है।
इसके अलावा, लोन जल्दी खत्म होने से व्यक्ति पर लंबे समय तक कर्ज की जिम्मेदारी नहीं रहती। रिटायरमेंट के करीब पहुंच रहे लोगों के लिए यह विकल्प खास तौर पर उपयोगी हो सकता है, क्योंकि वे चाहते हैं कि रिटायरमेंट से पहले Home Loan खत्म हो जाए।
EMI कम करने का विकल्प कब बेहतर है?
दूसरी तरफ, अगर आपकी मासिक आय स्थिर नहीं है या आने वाले समय में बड़े खर्च होने वाले हैं तो EMI कम करना राहत दे सकता है। उदाहरण के लिए बच्चों की पढ़ाई, शादी, मेडिकल खर्च, दूसरे जरूरी लोन या परिवार की अन्य वित्तीय जिम्मेदारियां हों तो हर महीने कम EMI चुकाना कैश फ्लो को बेहतर बना सकता है।
कम EMI का मतलब है कि आपकी मासिक आय का छोटा हिस्सा Home Loan में जाएगा। बची हुई रकम को आप Emergency Fund, निवेश, SIP या दूसरी जरूरी जरूरतों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
हालांकि, सिर्फ EMI कम होने को हमेशा आर्थिक बचत नहीं माना जा सकता। अगर EMI घटाने के साथ लोन की अवधि लंबी बनी रहती है, तो आप ज्यादा समय तक ब्याज चुकाते रहेंगे। इसलिए फैसला लेते समय केवल मासिक EMI नहीं, बल्कि पूरे लोन की कुल ब्याज लागत को देखना जरूरी है।
