Shehzad Poonawalla- भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद शहजाद पूनावाला ने अपने फैसले और भविष्य की योजनाओं को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका राजनीति छोड़ना किसी राजनीतिक मतभेद का नतीजा नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत और आपातकालीन आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण लिया गया एक व्यावहारिक निर्णय है।
"प्रवक्ता के पद पर वेतन नहीं मिलता"
बीजेपी छोड़ने के अपने फैसले पर बात करते हुए शहजाद पूनावाला ने बताया कि वह साल 2024 से ही राजनीति से दूरी बनाने और कॉरपोरेट/प्राइवेट सेक्टर में वापसी की योजना बना रहे थे। उन्होंने कहा, मैं एक वेतनभोगी नौकरी में था, जिसे मैंने राजनीति में आने के लिए छोड़ दिया था। मैंने राजनीति को अपना 24 घंटे और 365 दिन दिए। लेकिन पार्टी प्रवक्ता का पद एक स्वैच्छिक पद होता है, जिसमें कोई वेतन नहीं मिलता। मुझे अपना किराया देना है और अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करना है, इसलिए जब मुझे लगा कि यह 'नौकरी या राजनीति' में से किसी एक को चुनने का समय है, तो मैंने काम पर लौटने का फैसला किया।
30 जुलाई को दिया था पहला इस्तीफा
पूनावाला ने बताया कि उन्होंने पहली बार 30 जुलाई को ही पार्टी अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपा था। हालांकि, पार्टी ने उस वक्त उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। काफी विचार-विमर्श के बाद उन्होंने अपने फैसले पर टिके रहने का मन बनाया और 17 अगस्त को दोबारा अपना अंतिम इस्तीफा सौंपा।
"व्यवस्था छोड़ी है, विचार और व्यक्ति नहीं"
पार्टी के साथ अपने संबंधों को लेकर पूनावाला ने साफ किया कि उनके दिल में बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सम्मान हमेशा कायम रहेगा। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ही एक ऐसी पार्टी है जहां एक गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले युवा और पसमांदा मुस्लिम को इतना बड़ा मंच मिला।
पीएम मोदी का समर्थन जारी रहेगा
पूनावाला ने कहा, मैं पार्टी की व्यवस्था (संगठन) छोड़ रहा हूं, लेकिन व्यक्ति (पीएम मोदी) और विचार नहीं छोड़ रहा। प्राइवेट सेक्टर में रहने के बावजूद मैं प्रधानमंत्री मोदी के विज़न और उनके कार्यों का समर्थन करता रहूंगा।
मध्यम वर्ग के मुद्दों पर नया प्लेटफॉर्म: 'द मेनिफेस्टो'
आधिकारिक इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले पूनावाला ने सोशल मीडिया पर 'द मेनिफेस्टो' नाम से एक नई पहल की शुरुआत की है। इस पहल के जरिए वह देश के मध्यम वर्ग और टैक्सपेयर्स (करदाताओं) के मुद्दों को उठाने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यूरोपीय देशों की तर्ज पर टैक्स भरने के बावजूद भारतीय मध्यम वर्ग को बुनियादी सुविधाएं, अच्छी सड़कें और पारदर्शी व्यवस्था क्यों नहीं मिलती। उन्होंने मध्यम वर्ग पर टैक्स का बोझ कम करने और इनकम टैक्स स्लैब में राहत देने की भी वकालत की।
