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खुलते ही बाजार लाल! सेंसेक्स 500 अंक टूटा, निफ्टी 25700 से नीचे, ये हें गिरावट की बड़ी वजह

Share Market में तीन दिन से जारी तेजी पर ब्रेक लगता दिख रहा है। बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी सहित पूरे बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिल रही है। मार्केट ब्रेड्थ भी कमजोर हो रही है। आखिर किन वजहों से बाजार की तेजी पर ब्रेक लग रहा है, जानें।

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शेयर बाजार में गिरावट

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Share Market Today: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कमजोर शुरुआत की और तीन दिन की लगातार तेजी पर ब्रेक लगता दिख रहा है। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स करीब 500 अंक टूटकर 83,313.46 तक फिसल गया, जबकि निफ्टी 25,700 के अहम स्तर के नीचे आ गया है। शुरुआती कारोबार में बिकवाली व्यापक रही और मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी में 32 शेयर गिरावट में हैं, जबकि केवल 18 शेयरों में तेजी दिखी, जो बाजार की कमजोर ब्रेड्थ को दर्शाता है।

मेटल शेयरों में तेज बिकवाली

आज की गिरावट की अगुवाई मेटल शेयरों ने की। वैश्विक बाजार में धातुओं की कीमतों में कमजोरी के चलते निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 2% तक टूट गया। बीते तीन सत्रों में मेटल इंडेक्स लगभग 6% चढ़ चुका था, ऐसे में निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना। हिंडाल्को, टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसे शेयरों में दबाव साफ दिखा।

पीएसयू बैंक शेयरों ने दिया सहारा

जहां अधिकांश सेक्टर लाल निशान में रहे, वहीं आईटी और पीएसयू बैंक शेयरों में सीमित खरीदारी देखी गई। पिछली गिरावट के बाद आईटी शेयरों में हल्की रिकवरी देखने को मिली। इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो जैसे शेयरों ने बाजार को आंशिक सहारा दिया।

ग्लोबल बाजारों से नरमी के संकेत

एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। कोरिया का कोस्पी 3% से ज्यादा गिरा, जबकि जापान, चीन और हांगकांग के बाजार भी दबाव में रहे। अमेरिका में भी पिछला सत्र मिला-जुला रहा और टेक शेयरों में गिरावट जारी रही। इसी बीच निवेशक आरबीआई की मौद्रिक नीति के नतीजों का भी इंतजार कर रहे हैं, जो शुक्रवार को घोषित होंगे। बाजार को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा।

हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली हावी

पिछले तीन सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी करीब 4% तक उछले थे, जिसका कारण भारत-अमेरिका व्यापार आशावाद और एफआईआई की खरीदारी रही। लेकिन आज के सत्र में निवेशकों ने मुनाफा बुक करना बेहतर समझा, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया। अब बाजार की नजर ग्लोबल संकेतों और आरबीआई नीति पर रहेगी, जो अगले रुझान तय कर सकती है।

ये हैं गिरावट की प्रमुख वजह

  1. कमजोर ग्लोबल संकेत : एशियाई और अमेरिकी बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी दिखा, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट दबाव में रहा।
  2. मेटल शेयरों में भारी बिकवाली : वैश्विक कमोडिटी कीमतों में नरमी के चलते मेटल स्टॉक्स में तेज गिरावट आई और इस सेक्टर ने बाजार को नीचे खींचा।
  3. हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली पिछले तीन सत्रों में बाजार में मजबूत तेजी आई थी, जिसके बाद निवेशकों ने प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी
  4. मिडकैप और स्मॉलकैप में दबाव : व्यापक बाजार में बिकवाली बढ़ने से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी गिरावट की चपेट में आए, जिससे कमजोरी बढ़ी।
  5. आरबीआई नीति से पहले सतर्कता निवेशक आरबीआई की मौद्रिक नीति के फैसले से पहले नए दांव लगाने से बच रहे हैं, जिससे बाजार में दबाव बना।

ये हैं निफ्टी के टॉप लूजर्स

निफ्टी में आज की गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव मेटल और इंडस्ट्रियल शेयरों में देखने को मिला, जहां वैश्विक धातु कीमतों में कमजोरी और हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली ने हिंडाल्को, टाटा स्टील और BEL जैसे शेयरों को नीचे खींचा। वहीं इंडिगो, एशियन पेंट्स, टाइटन और भारती एयरटेल जैसे बड़े शेयरों में भी बिकवाली दिखी, जिससे इंडेक्स पर दबाव बढ़ा। बैंकिंग शेयरों में कमजोरी के कारण एक्सिस बैंक भी टॉप लूजर्स में शामिल रहा, जबकि व्यापक बाजार में बिकवाली बढ़ने से गिरावट का असर कई सेक्टरों में फैल गया।

शेयरLTP (₹)बदलाव (%)
हिंडाल्को931.45-3.47%
इंडिगो4,851.00-2.21%
टाटा मोटर्स PV368.05-1.97%
BEL431.90-1.66%
एशियन पेंट्स2,420.30-1.32%
इटर्नल290.35-1.29%
टाइटन4,094.70-1.19%
एक्सिस बैंक1,323.10-1.17%
टाटा स्टील193.15-1.15%
भारती एयरटेल2,003.50-1.10%
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Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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