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Success Story : Sarvam AI बनी यूनिकॉर्न, AI आत्मनिर्भरता में भारत की बड़ी कामयाबी

भारत ने जिस तरह से स्पेस टेक में अपनी धाक जमाई है। उसी तरह अब AI की दुनिया में भी भारत आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहा है। Sarvam AI की कामयाबी भारत की उम्मीदों को पंख देने वाली है।

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सर्वम AI बनी यूनिकॉर्न कंपनी

भारत आज AI की दौड़ में ठीक उस मोड़ पर खड़ा है, जहां एक दौर में स्पेस टेक्नोलॉजी की यात्रा की शुरुआत था। भारत को अमेरिका ने क्रायोजेनिक इंजन नहीं दिया। लेकिन, भारत ने फिर खुद का इंजन बनाया और आज दुनियाभर के सैटेलाइट लॉन्च करता है। ऐसा ही हाल AI का है। आज अमेरिका भारत सहित दुनिया को अपने सबसे एडवांस्ड AI मॉडल्स से दूर कर रहा है। लेकिन, स्वदेशी AI कंपनी सर्वम इस दिशा में भारत को आगे बढ़ा रही है।

Sarvam AI ने 234 मिलियन डॉलर की सीरीज-बी फंडिंग जुटाकर 1.5 अरब डॉलर की वैल्यूएशन हासिल किया है। अमेरिका में जहां AI पर काम कर रही कंपनियों को बेहिसाब पैसा मिल रहा है। उस दौर में सर्वम का यूनिकॉर्न बनना भारत के AI आत्मनिर्भता के लिहाज से बड़ी कामयाबी है। सर्वम 2026 की भारत की 5वीं यूनिकॉर्न कंपनी बनी है। लेकिन यह खबर सिर्फ एक स्टार्टअप के यूनिकॉर्न बनने की नहीं है। बल्कि, भारत की AI आत्मनिर्भरता की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी सफलता है।

AI और डाटा अब एसेट

दरअसल, दुनिया ऐसे दौर में पहुंच चुकी है जहां AI और डाटा केवल तकनीक नहीं, बल्कि आर्थिक ताकत, राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक प्रभाव का नया एसेट बन चुके हैं। Sarvam AI का यूनिकॉर्न बनना भारत की उस कोशिश को मजबूत करता है, जिसके तहत देश विदेशी AI मॉडल्स और तकनीकी कंपनियों पर निर्भरता कम करना चाहता है।

Sarvam AI क्यों है खास?

भारत में अधिकांश स्टार्टअप AI का उपयोग कर एप्लिकेशन या सेवाएं बनाते हैं। लेकिन Sarvam AI उन चुनिंदा कंपनियों में है जो AI की पूरी बुनियादी तकनीक विकसित करने की कोशिश कर रही हैं। कंपनी सिर्फ चैटबॉट या सॉफ्टवेयर नहीं बना रही, बल्कि बड़े भाषा मॉडल (LLMs), स्पीच मॉडल, विजन मॉडल और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काम कर रही है। सरल शब्दों में कहें तो Sarvam AI उन ईंटों को तैयार कर रही है जिन पर भविष्य की भारतीय AI अर्थव्यवस्था खड़ी हो सकती है। कंपनी ने Sarvam-105B और Sarvam-30B जैसे फाउंडेशन मॉडल विकसित किए हैं जो बहुभाषी क्षमता, दस्तावेज विश्लेषण और भारतीय उपयोगकर्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।

HCLTech का निवेश अहम

Sarvam AI की यूनिकॉर्न यात्रा में सबसे बड़ा योगदान HCLTech के निवेश का रहा है। कंपनी ने 1,427 करोड़ रुपये का निवेश कर Sarvam AI में 10.46 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है। यह निवेश केवल वित्तीय नहीं माना जा रहा। भारतीय आईटी उद्योग की एक दिग्गज कंपनी का किसी घरेलू AI प्लेटफॉर्म पर इतना बड़ा दांव यह संकेत देता है कि अब कॉरपोरेट भारत केवल विदेशी AI तकनीक का उपभोक्ता नहीं रहना चाहता, बल्कि उसके निर्माण में भी भागीदार बनना चाहता है।

कौन हैं कंपनी के फाउंडर?

डॉ. विवेक राघवन और डॉ. प्रत्यूष कुमार कंपनी के फाउंडर हैं। राघवन जहां इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन के एक्सपर्ट हैं। वे आधार डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोग्राम के पूर्व आर्किटेक्ट रह चुके हैं। फिलहाल कंपनी के बिजनेस लीडर के तौर पर काम कर रहे हैं। वहीं, प्रत्यूष कुमार माइक्रोसॉफ्ट में पूर्व रिसर्चर रहे हैं। इसके अलावा IIT मद्रास में फैकल्टी मेंबर हैं। इसके अलावा वे AI4Bharat पहल के पीछे एक ड्राइविंग फोर्स रहे हैं और भारतीय भाषाओं के हिसाब से AI बनाने पर फोकस कर रहे हैं।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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