भारत में आम आदमी के बजट को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली चीजों में पेट्रोल और डीजल शीर्ष पर हैं। जब भी पेट्रोल की कीमतें ₹100 प्रति लीटर के पार जाती हैं या उसमें थोड़ी भी बढ़ोतरी होती है, तो आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो पेट्रोल आपको पेट्रोल पंप पर इतना महंगा मिलता है, उसकी असल कीमत क्या है? क्यों ₹50-55 का पेट्रोल हमारे पास आते-आते दोगुना महंगा हो जाता है? इसका सीधा और बड़ा कारण है तेल पर लगने वाला भारी-भरकम टैक्स। आइए समझते हैं कि 1 लीटर पेट्रोल पर आप केंद्र और राज्य सरकार को कितना टैक्स चुकाते हैं।
कच्चे तेल से पेट्रोल पंप तक का सफर
जब भारत सरकार या तेल कंपनियां (जैसे IOCL, BPCL, HPCL) विदेशों से कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदती हैं, तो उसे बैरल में मापा जाता है। इस कच्चे तेल को भारत लाकर रिफाइनरियों में साफ किया जाता है, जिससे पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पाद बनते हैं। रिफाइनरी से निकलने के बाद, तेल का परिवहन (Transportation) खर्च और कंपनियों का मुनाफा जोड़ने के बाद पेट्रोल की मूल कीमत (Base Price) लगभग ₹50 से ₹55 प्रति लीटर के बीच बैठती है। यदि इस पर कोई टैक्स न हो, तो आपको पेट्रोल इसी दाम में मिलना चाहिए, लेकिन खेल इसके बाद शुरू होता है।
केंद्र सरकार का हिस्सा: एक्साइज ड्यूटी
जैसे ही पेट्रोल रिफाइनरी से बाहर निकलता है, सबसे पहले केंद्र सरकार इस पर अपना टैक्स लगाती है, जिसे 'सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी' कहा जाता है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने इस टैक्स में कई बदलाव किए हैं। वर्तमान में, केंद्र सरकार प्रति लीटर पेट्रोल पर लगभग 19 से 21 के बीच एक्साइज ड्यूटी वसूलती है। यह टैक्स पूरे देश में एक समान होता है, चाहे आप दिल्ली में तेल खरीदें या मुंबई में। इस टैक्स से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, हाईवे और विकास कार्यों में खर्च किया जाता है।
डीलर का कमीशन
पेट्रोल पंप तक तेल पहुंचने के बाद, पंप के मालिक (Dealer) का अपना खर्च और मुनाफा होता है। पेट्रोल पंप चलाने के लिए बिजली, स्टाफ की सैलरी और वाष्पीकरण (Evaporation) के कारण होने वाले नुकसान को कवर करने के लिए कंपनियां डीलर्स को कमीशन देती हैं। भारत में प्रति लीटर पेट्रोल पर डीलर का कमीशन लगभग ₹3.80 से ₹4.00 के बीच होता है। यह कमीशन भी आपकी जेब से ही जाता है।
राज्य सरकारों का वार
केंद्र के टैक्स और डीलर कमीशन के जुड़ने के बाद एंट्री होती है राज्य सरकारों की। हर राज्य सरकार अपने हिसाब से पेट्रोल पर वैट (Value Added Tax) या सेल्स टैक्स लगाती है। चूंकि वैट प्रतिशत (Percentage) में लगाया जाता है, इसलिए जैसे ही बेस प्राइस बदलता है, वैट की रकम भी बदल जाती है। यही कारण है कि देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल के दाम अलग-अलग होते हैं। उदाहरण के लिए, पोर्ट ब्लेयर (अंडमान) में वैट बहुत कम है, इसलिए वहां तेल सस्ता है, जबकि मुंबई, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में वैट की दरें बहुत ज्यादा हैं, जिससे वहां पेट्रोल ₹105 से ₹110 के पार चला जाता है। औसतन राज्य सरकारें प्रति लीटर ₹15 से ₹25 तक वैट वसूलती हैं।
