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सोना हमेशा चांदी के मुकाबले क्यों रहता है महंगा? पीछे छिपे हैं ये 5 चौंकाने वाले कारण

इन दोनों कीमती धातुओं के बीच का यह अंतर केवल 'चमक' का नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई भू-राजनीतिक, आर्थिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं। इन कारणों को समझना न केवल आपके लिए जरूरी है, बल्कि यह आपको एक बेहतर निवेशक बनाने में भी मदद कर सकता है।

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Gold More Expensive than Silver

दुनिया भर के बाजारों में सोने और चांदी को सबसे सुरक्षित और पसंदीदा निवेश माना जाता है। लेकिन एक सवाल जो अक्सर निवेशकों और आम लोगों के मन में आता है, वह यह है कि आखिर सोने की कीमत चांदी के मुकाबले इतनी ज्यादा क्यों होती है? सोने का भाव लाखों में होता है, वहीं चांदी इसके मुकाबले काफी सस्ती मिल जाती है। इन दोनों कीमती धातुओं के बीच का यह अंतर केवल 'चमक' का नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई भू-राजनीतिक, आर्थिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं। इन कारणों को समझना न केवल आपके लिए जरूरी है, बल्कि यह आपको एक बेहतर निवेशक बनाने में भी मदद कर सकता है।

क्या है कारण?

कीमतों में इस बड़े अंतर का सबसे पहला और मुख्य कारण है 'दुर्लभता' (Scarcity)। दुनिया में सोने का भंडार चांदी के मुकाबले बहुत कम है। अगर हम धरती की खुदाई से निकलने वाली धातुओं के अनुपात को देखें, तो हर एक औंस सोने के मुकाबले लगभग 15 से 20 औंस चांदी निकलती है। अर्थशास्त्र का सीधा नियम है कि जिस चीज की उपलब्धता कम होती है और मांग ज्यादा, उसकी कीमत उतनी ही अधिक होगी। सोना प्रकृति में बहुत कम मात्रा में पाया जाता है और इसे जमीन से निकालना भी काफी महंगा और जटिल काम है, यही वजह है कि यह हमेशा चांदी से कई गुना महंगा बना रहता है।

दूसरा बड़ा कारण है 'सेंट्रल बैंक और रिजर्व'। दुनिया भर के देशों के केंद्रीय बैंक (जैसे भारत का RBI या अमेरिका का फेडरल रिजर्व) अपने विदेशी मुद्रा भंडार के हिस्से के रूप में सोने को सुरक्षित रखते हैं। सोना एक ऐसी संपत्ति है जो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था गिरने पर उसे सहारा देती है। चांदी को बैंक उस स्तर पर रिजर्व के रूप में नहीं रखते। जब बड़े संस्थान और सरकारें किसी धातु को 'सेफ हेवन' (Safe Haven) मानकर उसे करोड़ों की मात्रा में खरीदती हैं, तो उसकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है। सोने को 'मुद्रा' (Currency) का दर्जा प्राप्त है, जबकि चांदी को अक्सर एक 'औद्योगिक धातु' (Industrial Metal) के रूप में देखा जाता है।

तीसरा कारण इन दोनों धातुओं के इस्तेमाल का तरीका है। चांदी का इस्तेमाल मोबाइल फोन, कंप्यूटर, सोलर पैनल और चिकित्सा उपकरणों जैसे उद्योगों में बहुत ज्यादा होता है। यानी चांदी एक 'खपत' होने वाली धातु है। दूसरी ओर, सोने का 90% से ज्यादा इस्तेमाल केवल गहने बनाने या निवेश (Investment) के रूप में किया जाता है। सोना खराब नहीं होता और इसे बार-बार रीसायकल किया जा सकता है। लेकिन चांदी का औद्योगिक उपयोग इतना ज्यादा है कि यह अर्थव्यवस्था की मांग और सप्लाई के चक्र में उलझी रहती है। उद्योगों में मांग घटने पर चांदी के दाम तेजी से गिर सकते हैं, लेकिन सोने के साथ ऐसा कम ही होता है।

इसके अलावा, लिक्विडिटी और पोर्टेबिलिटी भी एक बड़ा फैक्टर है। सोना कम वजन में बहुत अधिक मूल्य (Value) रखता है। उदाहरण के लिए, आप अपनी जेब में 10 लाख रुपये का सोना आसानी से ले जा सकते हैं, लेकिन 10 लाख रुपये की चांदी ले जाने के लिए आपको एक बड़े बैग या ट्रक की जरूरत पड़ सकती है। यही कारण है कि बड़े निवेशक और आम लोग भी संकट के समय के लिए सोने को ज्यादा तवज्जो देते हैं। इसे दुनिया के किसी भी कोने में आसानी से बेचा जा सकता है और इसकी कीमत लगभग हर देश में एक समान मानक पर चलती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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