दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा (Burj Khalifa) सिर्फ अपनी ऊंचाई के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी भव्यता और आलीशान सुविधाओं के लिए भी मशहूर है। दुबई में स्थित यह इमारत दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी रहती है लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर इस विशाल इमारत का मालिक कौन है और इससे होने वाली कमाई किसके पास जाती है।
किसने बनवाया था बुर्ज खलीफा?
बुर्ज खलीफा का निर्माण दुबई की प्रसिद्ध रियल एस्टेट कंपनी Emaar Properties ने कराया था। इस इमारत का उद्घाटन साल 2010 में किया गया था। शुरुआत में इसका नाम “बुर्ज दुबई” रखा गया था, लेकिन बाद में संयुक्त अरब अमीरात के तत्कालीन राष्ट्रपति Khalifa bin Zayed Al Nahyan के सम्मान में इसका नाम बदलकर बुर्ज खलीफा कर दिया गया। करीब 828 मीटर ऊंची इस इमारत को बनाने में अरबों डॉलर खर्च हुए थे। इसमें होटल, लग्जरी अपार्टमेंट, ऑफिस और ऑब्जर्वेशन डेक जैसी कई सुविधाएं मौजूद हैं।
क्या एक ही व्यक्ति है मालिक?
बहुत से लोग सोचते हैं कि बुर्ज खलीफा का मालिक कोई एक अरबपति व्यक्ति होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। इस इमारत का मुख्य स्वामित्व इमार प्रॉपर्टीज के पास है, हालांकि इसके भीतर मौजूद कई अपार्टमेंट, ऑफिस और कमर्शियल स्पेस अलग-अलग निवेशकों और कंपनियों ने खरीद रखे हैं यानी पूरी बिल्डिंग किसी एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि इसके अलग-अलग हिस्सों के अलग मालिक हैं। फिर भी इमारत का संचालन और प्रबंधन मुख्य रूप से इमार प्रॉपर्टीज ही करती है।

Burj Khalifa
किराया कौन वसूलता है?
बुर्ज खलीफा में मौजूद अपार्टमेंट और ऑफिस से होने वाली कमाई संबंधित मालिकों को मिलती है। अगर किसी व्यक्ति या कंपनी ने वहां कोई फ्लैट या ऑफिस खरीदा है, तो उसका किराया वही वसूलता है। वहीं जिन हिस्सों का स्वामित्व अभी भी इमार प्रॉपर्टीज के पास है, उनका किराया कंपनी को मिलता है। इसके अलावा इमारत में मौजूद होटल, रेस्टोरेंट, पर्यटन टिकट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से भी बड़ी कमाई होती है। खासतौर पर ऑब्जर्वेशन डेक से हर साल लाखों पर्यटक दुबई का नजारा देखने पहुंचते हैं।
दुबई की पहचान बन चुका है बुर्ज खलीफा
आज बुर्ज खलीफा सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि दुबई की पहचान बन चुका है। यह आधुनिक इंजीनियरिंग, लग्जरी लाइफस्टाइल और बिजनेस का बड़ा केंद्र माना जाता है। दुनियाभर से आने वाले पर्यटक इसकी ऊंचाई और शानदार डिजाइन को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं।
