Nifty Gold Ratio: शेयर बाजार और सोने के बीच एक खास संतुलन रहता है। आमतौर पर दोनों विरोधाभासी एसेट्स माना जाते हैं। जब परिस्थितियां अस्थिर होती हैं, अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने में निवेश बढ़ता है। जब परिस्थितियां स्थिर होती हैं, तो निवेशक रिस्क उठाते हैं और स्टॉक्स में निवेश बढ़ाते हैं। मौजूदा ग्लोबल हालात बेहद अस्थिर और अनिश्चितता से भरे हैं। गोल्ड उम्मीद के मुताबिक परफॉर्म नहीं कर रहा है। वहीं, शेयर बाजार में तबाही आई हुई है।
बहरहाल, गोल्ड और भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क निफ्टी के बीच एक खास संतुलन रहता है। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो दोनों में एक में जोरदार रैली देखने को मिलती है। इस संतुलन को निफ्टी गोल्ड रेश्यो कहा जाता है।
क्या है
Nifty 50 और गोल्ड के बीच का यह रेश्यो बताता है कि दोनों एसेट क्लास में कौन बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। जब यह रेशियो गिरता है, तो इसका मतलब होता है कि सोना शेयर बाजार से बेहतर रिटर्न दे रहा है और निवेशक सुरक्षित विकल्प की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
कैसे निकाला जाता है रेश्यो?
मौजूदा डेटा के आधार पर Nifty 50 22,331.40 के स्तर पर है, जबकि 10 ग्राम गोल्ड की कीमत ₹1,51,775 है। इस हिसाब से Nifty-Gold Ratio करीब 0.15 निकलता है, जिसे एनालिस्ट तुलना आसान बनाने के लिए स्केल करके 1.5 के रूप में देखते हैं। यह स्तर संकेत देता है कि गोल्ड के मुकाबले इक्विटी की वैल्यू काफी नीचे आ गई है, यानी बाजार अपेक्षाकृत सस्ता नजर आ रहा है और यही वह जोन है जहां से ऐतिहासिक रूप से शेयर बाजार में रिकवरी देखने को मिली है।
1.5 का लेवल क्या संकेत देता है?
इतिहास बताता है कि जब यह रेशियो 2.5 से नीचे जाता है, तो इक्विटी बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिलती है। मौजूदा 1.5 का स्तर इस बात का संकेत है कि शेयर बाजार अपेक्षाकृत सस्ता हो गया है और यहां से उछाल की संभावना बन सकती है।
क्या इक्विटी ओवरसोल्ड है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह स्तर बताता है कि इक्विटी गोल्ड के मुकाबले अंडरवैल्यूड हो गई है। Religare Broking के अनुसार, यह वह जोन है जहां से अक्सर मल्टी-ईयर रैली की शुरुआत होती है, बशर्ते मैक्रो परिस्थितियां सुधरें।
सोना क्यों निवेशकों की पहली पसंद?
हाल के महीनों में गोल्ड ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इसके पीछे कई कारण हैं जैसे जियोपॉलिटिकल टेंशन, महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपया। इन स्थितियों में निवेशक सुरक्षित एसेट की ओर झुकते हैं, जिससे गोल्ड की डिमांड बढ़ती है।
क्या यह इक्विटी में एंट्री का मौका है?
INVasset PMS के अनुसार, यह रेशियो टाइमिंग टूल नहीं बल्कि वैल्यूएशन इंडिकेटर है। यानी यह दिखाता है कि शेयर बाजार सस्ता है, लेकिन तेजी तभी आएगी जब महंगाई कम हो, कच्चे तेल के दाम स्थिर हों और कंपनियों की कमाई बेहतर दिखे।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
मौजूदा संकेत यह बताते हैं कि निवेशकों को सिर्फ एक एसेट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। गोल्ड और इक्विटी दोनों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। बदलते मैक्रो माहौल में एसेट एलोकेशन ही लॉन्ग टर्म रिटर्न का सबसे बड़ा फैक्टर बनकर उभर रहा है।
संकेत तेजी का, लेकिन शर्तों के साथ
Nifty-Gold Ratio का 1.5 पर आना संकेत देता है कि शेयर बाजार में वैल्यू उभर रही है। लेकिन यह तेजी तभी टिकाऊ होगी जब मैक्रो इकोनॉमिक हालात सपोर्ट करें। फिलहाल बाजार में सतर्क आशावाद (cautious optimism) का माहौल बना हुआ है।
डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
