Adventure Deposit: FD से भी ज्यादा ब्याज वाला नया निवेश विकल्प! क्या है और कैसे काम करता है?
- Authored by: रिचा त्रिपाठी
- Updated Dec 11, 2025, 08:38 AM IST
यह नया कॉन्सेप्ट पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट से बिल्कुल अलग है। एडवेंचर डिपॉजिट एक ऐसा बैंकिंग उत्पाद है जिसमें आपको FD से ज्यादा ब्याज मिलता है, लेकिन इसके बदले थोड़ा जोखिम भी लेना पड़ता है। इसमें बैंक आपकी जमा राशि को खास तरह के लोन में लगाता है और उसी लोन के प्रदर्शन के आधार पर आपका रिटर्न तय होता है। यानी अगर आप सुरक्षित निवेश के साथ थोड़ा अतिरिक्त फायदा कमाना चाहते हैं, तो एडवेंचर डिपॉजिट एक दिलचस्प विकल्प बन सकता है।
Adventure Deposit
बदलते समय में निवेशकों का रुझान तेजी से बदल रहा है। जहां पहले लोग सुरक्षित ब्याज के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर भरोसा करते थे, वहीं अब कम ब्याज दरों के कारण लोग बाजार से जुड़े साधनों की ओर बढ़ रहे हैं। ज्यादा रिटर्न की चाहत और थोड़े जोखिम को स्वीकार करने की सोच ने एक नए निवेश विकल्प को जन्म दिया है एडवेंचर डिपॉजिट। इसे आप बैंक जमाओं और कैपिटल मार्केट का मिक्स कह सकते हैं। यह उत्पाद इस सोच के साथ लाया जा रहा है कि निवेशकों को FD से ज्यादा रिटर्न मिले, लेकिन जोखिम बहुत ज्यादा भी न हो।
कम रेटिंग वाले उधारकर्ताओं को मिलेगा लाभ
मौजूदा वित्तीय व्यवस्था में AA या AAA रेटेड कंपनियों को आसानी से लोन मिलता है। लेकिन कम रेटिंग वाली कंपनियां, जैसे BBB या BB रेटेड, बॉन्ड मार्केट से पैसा नहीं जुटा पातीं। ऐसी कंपनियां अक्सर सिर्फ बैंकों पर निर्भर रहती हैं। बैंक भी अधिकतर गिरवी (Collateral) के बदले ही उन्हें लोन देते हैं। ऐसे में एडवेंचर डिपॉजिट का उद्देश्य इन्हीं कम रेटेड कंपनियों को उचित ब्याज पर धन उपलब्ध कराना है। यह डिपॉजिट किसी हद तक ग्रीन डिपॉजिट या ग्रीन लोन की तर्ज पर काम करेगा। यानी जमा किए गए पैसों का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लोन देने में किया जाएगा।
कितना मिलता है ब्याज
आज जहां FD पर 5.85% से 6.6% तक ब्याज मिलता है, वहीं एडवेंचर डिपॉजिट में यह ब्याज बढ़कर 7.85% से 8.6% तक हो सकता है। यानी ग्राहक को लगभग 2% ज्यादा रिटर्न मिल सकता है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। लेकिन क्योंकि यह डिपॉजिट जोखिम वाले लोन से जुड़ा है, इसलिए रिटर्न पूरी तरह गारंटीड नहीं होगा। यदि लोन समय पर नहीं लौटते या बैंक को प्रावधान (Provisioning) करना पड़ता है, तो ब्याज में थोड़ी कटौती हो सकती है।
ब्याज दर कैसे तय होगी?
जब तक बैंक आपकी जमा राशि को किसी लोन में नहीं लगाता, तब तक आपको बिल्कुल सामान्य सेविंग अकाउंट की तरह तय और गारंटीड ब्याज मिलता रहेगा। लेकिन जैसे ही आपका पैसा लोन के पूल में शामिल किया जाएगा, ब्याज दर बदल जाती है और एक पहले से तय किए गए फॉर्मूले के आधार पर तय होती है। यह फॉर्मूला इस बात पर निर्भर करता है कि उधार लेने वाले कितने जोखिम वाले हैं, लोन देने में बैंक की कुल लागत कितनी है और पूरा लोन-पूल कितना अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। इसी आधार पर ब्याज में उतार-चढ़ाव होता है। हर तीन महीने में ब्याज दर की समीक्षा की जाती है बिल्कुल उसी तरह जैसे MCLR आधारित लोन की ब्याज दरें समय-समय पर अपडेट होती हैं।
जोखिम और नुकसान की संभावना
क्योंकि ये डिपॉजिट कम रेटिंग वाले लोन से जुड़े हैं, इसलिए कुछ जोखिम होना स्वाभाविक है। अगर कुछ लोन समय पर वापस न आएं, तो इससे कॉर्पस की आमदनी कम होगी और निवेशकों का रिटर्न घट सकता है। अगर किसी लोन को बैंक को राइट-ऑफ करना पड़े, तो ब्याज में और कमी आ सकती है। हालांकि, लोन पूल विविध (Diversified) होंगे, इसलिए सभी लोन एक साथ फेल होने की संभावना बहुत कम है। इस वजह से समग्र रूप से बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद बनी रहती है।
कैसे काम करता है ये डिपॉजिट
एडवेंचर डिपॉजिट तीन मुख्य सिद्धांतों पर काम करते हैं, जिनसे इसका पूरा ढांचा तैयार होता है। पहला सिद्धांत इस्पेसिफाइड बेस्ड लोन जमा है, यानी जो पैसा ग्राहक जमा करता है, उसे किसी खास श्रेणी या कैटेगरी के लोन से सीधे जोड़ा जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि आपकी जमा राशि उन विशेष उधारकर्ताओं को दिए गए लोन के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी। दूसरा सिद्धांत है लोन पूलिंग, जिसमें कई लोन को मिलाकर एक बड़ा पूल बनाया जाता है, जैसा कि एसेट सिक्योरिटाइजेशन में किया जाता है। इससे जोखिम बंट जाता है और एक-दो लोन खराब होने पर भी कुल पूल सुरक्षित रहता है।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है परिवर्तनीय ब्याज दर, जिसमें डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज फिक्स नहीं होता, बल्कि लोन पूल के प्रदर्शन के अनुसार समय-समय पर बदलता रहता है। यानी अगर पूल अच्छा परफॉर्म करे तो ब्याज दर बढ़ सकती है, और प्रदर्शन कमजोर होने पर ब्याज थोड़ा कम भी हो सकता है। इन तीन सिद्धांतों के आधार पर एडवेंचर डिपॉज़िट को एक मार्केट-लिंक्ड और हाई-रिटर्न निवेश विकल्प बनाया गया है।
किसे क्या फायदा होगा?
इन एडवेंचर डिपॉजिट से तीनों पक्षों बैंक, उधारकर्ता और जमाकर्ता को फायदा मिलता है। बैंकों को इससे ज्यादा फंड जुटाने का मौका मिलता है, जिससे उनका कुल कारोबार बढ़ता है, भले ही उन्हें थोड़ा अधिक ब्याज देना पड़े। दूसरी ओर, कम रेटिंग वाले उधारकर्ताओं को NBFCs और फिनटेक कंपनियों की तुलना में सस्ता कर्ज मिल जाता है, जिससे उनकी फंडिंग की समस्या काफी हद तक हल होती है। वहीं जमाकर्ताओं के लिए यह स्कीम और भी आकर्षक बनती है, क्योंकि उन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की तुलना में ज्यादा ब्याज मिलता है। साथ ही यह भरोसा भी रहता है कि जिन लोन के खिलाफ जमा जुड़ी है, वे कोलैटरल से सुरक्षित हैं, जिससे जोखिम थोड़ा कम महसूस होता है।
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