जरा सोचिए कि आप एक सुबह जागते हैं और अचानक आपको यह अहसास होता है कि आज आपको काम पर नहीं जाना है। ऐसा इसलिए नहीं है कि आप बीमार हैं या आप किसी छुट्टी पर हैं, बल्कि इसलिए है क्योंकि आपका बैंक खाता खुद-ब-खुद इतना पैसा बना रहा है जो जीवन भर आपकी लाइफस्टाइल के सारे खर्चों को आसानी से पूरा कर सकता है। यह कोई ऐसा ख्वाब नहीं है जो सिर्फ अरबपतियों के लिए ही हो, बल्कि यही 'फायर' (FIRE Financial Independence, Retire Early) आंदोलन का असली मूल विचार है। इसे हासिल करने के लिए आपको किसी चमत्कारी भाग्य की जरूरत नहीं है, बल्कि सिर्फ एक सही आंकड़े को जानने की आवश्यकता है।
पर्सनल फाइनेंस की दुनिया में इस बड़े मील के पत्थर को आपका 'फ्रीडम नंबर' (Freedom Number) कहा जाता है। आपका फ्रीडम नंबर असल में आपके निवेश पोर्टफोलियो का वह सटीक और निश्चित आकार है, जिसे हासिल करने के बाद आप पूरी सहजता से अपना जीवन जी सकते हैं और आपको अपनी रोजमर्रा की जरूरतों यानी तनख्वाह के लिए अपने कीमती समय का सौदा दोबारा कभी नहीं करना पड़ता। इसकी गणना करना बेहद आसान है। आइए, जानते हैं क्या होता है फ्रीडम नंबर और ये कैसे तय करता है आपकी रिटायरमेंट (Retirement)?
क्या है Freedom Number?
बहुत ही सरल शब्दों में कहें तो 'फ्रीडम नंबर' वह कुल जमा पूंजी या फंड (Corpus) है, जिसे इकट्ठा करने के बाद आपको अपने रोजमर्रा के खर्चों को चलाने के लिए दोबारा कभी नौकरी करने या किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह वह वित्तीय सुरक्षा कवच है जिसके बाद आपके बैंक खाते में इतना पैसा आ जाता है कि उसके ब्याज, डिविडेंड या निवेश रिटर्न से आपके पूरे जीवन के सारे खर्चे आसानी से चलते रहते हैं। इस नंबर को हासिल करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप जिंदगी भर बिस्तर पर लेटे रहें या खाली बैठ जाएं; इसका मतलब सिर्फ यह है कि अब आप पैसे कमाने के मानसिक दबाव से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं और अपनी मर्जी का कोई भी नया काम, बिजनेस या शौक पूरा करने के लिए स्वतंत्र हैं।
कैसे कैलकुलेट करें फ्रीडम नंबर?
एक्सपर्ट्स इसके लिए एक बहुत ही आसान और लोकप्रिय फॉर्मूला बताते हैं, जिसे '25X रूल' (25 गुना नियम) कहा जाता है। इस नियम के अनुसार, आपको सबसे पहले अपने पूरे साल भर के कुल खर्च का सही-सही और व्यावहारिक अंदाजा लगाना होता है। मान लीजिए कि आज के समय में आपका मासिक घरेलू खर्च 50,000 रुपये है, तो इस हिसाब से आपका सालाना खर्च 6 लाख रुपये बनता है। अब इस सालाना खर्च को सीधे 25 से गुणा (Multiply) कर दीजिए। 6 लाख को 25 से गुणा करने पर जो रकम आएगी, वह होगी 1.5 करोड़ रुपये। यही 1.5 करोड़ रुपये आपका 'फ्रीडम नंबर' कहलाएगा। यानी यदि आपके पास यह फंड सुरक्षित है, तो आप समय से पहले रिटायरमेंट का बड़ा फैसला ले सकते हैं।
इस नियम के साथ ही एक और जरूरी सिद्धांत काम करता है, जिसे पर्सनल फाइनेंस की दुनिया में '4% विड्रॉल रूल' (4 प्रतिशत निकासी नियम) कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि जब आप अपना फ्रीडम नंबर (जैसे 1.5 करोड़ रुपये) हासिल कर लेते हैं, तो उसे किसी सुरक्षित जगह या म्यूचुअल फंड, इंडेक्स फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे अन्य निवेश विकल्पों में इस तरह बांटकर निवेश करते हैं जहां से आपको सालाना औसतन 8 से 10% का रिटर्न मिलता रहे। अब यदि आप हर साल इस पूरे फंड में से केवल 4% हिस्सा (यानी पहले साल 6 लाख रुपये) अपने खर्च के लिए निकालते हैं, तो महंगाई को एडजस्ट करने के बाद भी आपका यह मूल फंड कभी खत्म नहीं होगा और जीवन भर आपको रेगुलर इनकम देता रहेगा।
इन बातों को न करें नजरअंदाज
हालांकि, अपना फ्रीडम नंबर तय करते समय कुछ बेहद महत्वपूर्ण बातों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जिनमें सबसे बड़ी चुनौती है 'महंगाई' (Inflation)। आज जो घर खर्च 50,000 रुपये में आसानी से चल रहा है, आने वाले 15 या 20 सालों में महंगाई के कारण उसी लाइफस्टाइल के लिए शायद 1 लाख या 1.5 लाख रुपये की जरूरत होगी। इसलिए, जब भी आप अपना फ्रीडम नंबर कैलकुलेट करें, तो उसमें भविष्य की महंगाई दर (आमतौर पर 6 से 7 फीसदी) को जरूर जोड़कर चलें। इसके अलावा, उम्र बढ़ने के साथ आने वाले मेडिकल और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए एक अलग से बड़ा इमरजेंसी और हेल्थ इंश्योरेंस फंड रखना भी अनिवार्य है, ताकि किसी बड़ी बीमारी के समय आपके फ्रीडम नंबर पर कोई आंच न आए।
जवानी में ही इस फ्रीडम नंबर तक पहुंचने के लिए आपको अपनी वित्तीय रणनीति में दो मुख्य बदलाव करने होंगे अपनी बचत की दर (Savings Rate) को बढ़ाना और सही जगह निवेश करना। यदि आप अपनी सैलरी का 50 से 60 फीसदी हिस्सा बचाकर उसे इक्विटी म्यूचुअल फंड (SIP), अच्छे स्टॉक्स या अन्य हाई-रिटर्न एसेट्स में अनुशासित होकर निवेश करते हैं, तो कंपाउंडिंग (ब्याज पर ब्याज) की ताकत से आप बहुत ही कम उम्र में अपने इस जादुई आंकड़े को छू सकते हैं।
