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मैच्योरिटी से पहले न तोड़ें FD! पहले समझ लें आपकी जमा पूंजी पर पेनल्टी का पूरा गणित

एफडी को सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है। हालांकि, कई बार पैसों की जरूरत आपको आपकी एफडी मैच्योरिटी से पहले ही ब्रेक करने पर मजबूर कर सकती है। ऐसा करते हैं तो आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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FD (AI Generated Image)

FD (Fixed Deposit) को सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक माना जाता है। लोग इसमें एक तय अवधि के लिए पैसा जमा करते हैं और बदले में निश्चित ब्याज दर पर गांरटीड रिटर्न पाते हैं। लेकिन कई बार अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर कुछ लोग FD को मैच्योरिटी से पहले ही ब्रेक कर देते हैं, जिसे Premature Withdrawal कहा जाता है। हालांकि FD को समय से पहले तोड़ने पर बैंक कुछ पेनल्टी चार्ज करता है, जिससे मिलने वाला ब्याज कम हो सकता है। आइए जानते हैं एफडी को मैच्योरिटी से पहले ब्रेक करने पर क्या नुकसान होता है-

ब्याज दर बदल जाएगी

जब कोई व्यक्ति FD को मैच्योरिटी से पहले बंद करता है तो बैंक पहले तय की गई ब्याज दर नहीं देता। इसके बजाय बैंक उस अवधि के हिसाब से ब्याज देता है, जितने समय तक पैसा FD में जमा रहा। इसके बाद उस ब्याज दर पर पेनल्टी भी काटी जाती है।

मैच्योरिटी से पहले पैसे निकालने पर पेनल्टी

FD Interest Rates

FD (Photo: iStock)

उदाहरण के तौर पर मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 3 साल के लिए 5 लाख रुपये की FD करवाई थी, जिस पर 7 प्रतिशत ब्याज मिल रहा था। लेकिन उसे 1 साल बाद पैसों की जरूरत पड़ गई और उसने FD तोड़ दी। ऐसी स्थिति में बैंक 3 साल वाली ब्याज दर नहीं देगा। बैंक 1 साल की FD पर लागू ब्याज दर के हिसाब से ब्याज कैलकुलेट करेगा और फिर Premature Withdrawal Penalty काटेगा।

कई मामलों में Premature Withdrawal पर 0.50 प्रतिशत से 1 प्रतिशत तक पेनल्टी लगाई जा सकती है। यानी अगर 1 साल की अवधि के लिए ब्याज दर 6.5 प्रतिशत हो और बैंक 1 प्रतिशत पेनल्टी लगाए तो ग्राहक को प्रभावी ब्याज दर लगभग 5.5 प्रतिशत के हिसाब से रिटर्न मिल सकता है।

टैक्स और बैंकिंग फायदों पर भी असर

FD को मैच्योरिटी से पहले तोड़ने पर केवल ब्याज ही कम नहीं होता, बल्कि टैक्स और बैंकिंग फायदे पर भी असर पड़ सकता है। Premature withdrawal के बाद बैंक कम ब्याज दर के हिसाब से TDS दोबारा कैलकुलेट करता है, जिससे Tax liability बदल सकती है।

पेनल्टी कैलकुलेशन समझना क्यों जरूरी

एक्सपर्टस मानते हैं कि FD तोड़ने से पहले पेनल्टी कैलकुलेशन समझना जरूरी होता है। कई लोग सोचते हैं कि पेनल्टी केवल ब्याज पर लगती है, लेकिन असल में ब्याज दर ही कम कर दी जाती है। इससे मैच्योरिटी अमाउंट पर बड़ा असर पड़ सकता है। खासकर लंबी अवधि की FD को जल्दी तोड़ने पर नुकसान ज्यादा महसूस हो सकता है। हालांकि कुछ स्पेशल एफडी स्कीम में Premature Withdrawal की सुविधा ही नहीं होती। उदाहरण के तौर पर Tax Saving FD में lock-in period रहता है और इसे समय से पहले बंद नहीं किया जा सकता। I

Loan against FD एक अच्छा ऑप्शन

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि इमरजेंसी में FD तोड़ने की बजाय पहले loan against FD ऑप्शन पर विचार करना चाहिए। कई बैंक FD पर 90 प्रतिशत तक लोन या ओवरड्राफ्ट सुविधा देते हैं। इसका फायदा यह होता है कि FD जारी रहती है और निवेशक को पूरा ब्याज भी मिलता रहता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

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