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वॉरेन बफे ने खोला कामयाबी का राज, बताया कैसे स्टॉकब्रोकर पिता ने दिखाई अमीरी की राह?

दुनिया के सबसे अमीर और कामयाब निवेशक वॉरेन बफे ने अपनी कामयाबी का सबसे बड़ा राज खोलते हुए बताया है कि कैसे अमीर बने। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वे दुनिया के 10 सबसे लकी लोगों में शामिल हैं।

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वॉरेन बफे ने बताया कैसे हुए कामयाब

Warren Buffett Success Story : दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में गिने जाने वाले वॉरेन बफे का कहना है कि उनकी 147 अरब डॉलर की दौलत सिर्फ उनकी मेहनत या समझदारी का नतीजा नहीं है। उनके मुताबिक, किस्मत ने उनकी जिंदगी में सबसे बड़ा रोल निभाया। एक इंटरव्यू में बफे ने कहा कि वह खुद को दुनिया के सबसे खुशनसीब लोगों में मानते हैं। उन्होंने कहा, "करीब 8 अरब लोगों में मैं शायद 10 सबसे खुशनसीब लोगों में हूं।" 'अगर मेरे पिता प्लंबर होते, तो शायद मैं यहां नहीं होता'

95 वर्षीय बफे ने कहा कि उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह यह रही कि उन्हें बहुत कम उम्र में वही काम मिल गया, जिसे वह सबसे ज्यादा पसंद करते थे। उनके पिता हॉवर्ड होमन बफे स्टॉकब्रोकर थे। इसी वजह से उन्हें बचपन में शेयर बाजार को करीब से देखने और समझने का मौका मिला। बफे ने कहा, "अगर मेरे पिता प्लंबर होते, तो शायद मुझे निवेश की दुनिया से परिचय ही नहीं मिलता।" उनका कहना था कि यह उनकी किस्मत थी, न कि कोई पहले से बनाई गई योजना।

11 साल की उम्र में खरीदा पहला शेयर

बफे ने महज 11 साल की उम्र में अपना पहला निवेश किया था। उन्होंने सिटीज सर्विस कंपनी के तीन शेयर 38 डॉलर प्रति शेयर के भाव से खरीदे थे। यही छोटा निवेश आगे चलकर उन्हें दुनिया के सबसे सफल निवेशकों की सूची में ले गया। उन्होंने कई बार कहा है कि किसी भी क्षेत्र में जल्दी शुरुआत करने का फायदा जीवनभर मिलता है। निवेश के मामले में भी उनके साथ यही हुआ।

कामयाबी में ओवेरियन लॉटरी अहम

बफे का मानना है कि किसी इंसान की सफलता सिर्फ उसकी मेहनत पर निर्भर नहीं करती। वह अक्सर "ओवेरियन लॉटरी" की बात करते हैं। इसका मतलब है कि इंसान कहां पैदा हुआ, किस परिवार में जन्म लिया और उसे किस तरह के मौके मिले, ये सभी बातें उसकी जिंदगी की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। उन्होंने 2024 में बर्कशायर हैथवे के शेयरधारकों को लिखे पत्र में भी स्वीकार किया था कि अमेरिका में जन्म लेना और शुरुआती दौर में सही अवसर मिलना उनकी सफलता के बड़े कारणों में शामिल रहा।

95 की उम्र में भी सक्रिय

वॉरेन बफे पिछले साल बर्कशायर हैथवे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद से हट गए थे। अब कंपनी की कमान ग्रेग एबेल के हाथ में है। हालांकि, बफे अब भी कंपनी के कामकाज और बड़े फैसलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने 32 साल की उम्र में अपना पहला 10 लाख डॉलर कमाया था और बाद में बर्कशायर हैथवे को दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल कर दिया।

अब परिवार करेगा संपत्ति का बंटवारा

बफे ने 2010 में अपनी 99% संपत्ति दान करने का संकल्प लिया था। इस साल उन्होंने पहली बार करीब दो दशक बाद बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन को दान नहीं दिया। अब उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा परिवार से जुड़े ट्रस्ट और फाउंडेशन को मिलेगा। उन्होंने हाल ही में कहा कि वह चाहते हैं कि उनके तीनों बच्चे 31 दिसंबर 2034 तक उनकी पूरी संपत्ति तय योजना के अनुसार दान कर दें।

क्या है बफे की सबसे बड़ी सीख?

वॉरेन बफे की कहानी बताती है कि मेहनत और सही फैसले जितने जरूरी हैं, उतना ही अहम सही समय पर सही अवसर मिलना भी है। बफे मानते हैं कि उन्हें निवेश की दुनिया से जल्दी परिचय मिला, इसलिए वह अपनी रुचि को करियर में बदल सके। उनका संदेश है कि सफलता के पीछे सिर्फ प्रतिभा नहीं, बल्कि किस्मत और अवसर भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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