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2026 में पैसा बनाना है? कहां और कैसे करें निवेश, जानें इन्वेस्टमेंट का पूरा ABC

नया वित्त वर्ष शुरू होने में अभी तीन महीने बाकी हैं, लेकिन जनवरी को आमतौर पर एक साइकोलॉजिकल रीसेट के तौर पर देखा जाता है। इन्वेस्टर्स आमतौर पर नए इन्वेस्टमेंट को सालाना बजट, सैलरी रिवीजन और आने वाले फाइनेंशियल साल के लिए टैक्स प्लानिंग के साथ शुरू करते हैं।

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2026 के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग

नए साल की शुरुआत सेविंग की आदतों और लंबे समय के गोल के लिए निवेश करने के लिए प्रेरित करता है। इसके चतले यह समय पहली बार निवेश करने वालों के साथ-साथ अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने वालों के लिए भी एक बेहतरीन समय बन जाता है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था लचीलापन दिखा रही है। इसलिए मार्केट को टाइम करने के बजाय अनुशासित निवेश करना लंबे समय में वेल्थ क्रिएशन की कुंजी बना हुआ है।

निवेश के ये सारे विकल्प उपलब्ध

फाइनेंशियल प्लानर का कहना है कि आज छोटे निवेशकों के पास कई तरह के इन्वेस्टमेंट ऑप्शन हैं। शेयर और म्यूचुअल फंड युवा और नए निवेशकों के बीच सबसे ज्यादा पॉपुलर हैं, जबकि डेट म्यूचुअल फंड, छोटी बचत योजनाएं और बैंक डिपॉजिट जैसे फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट कम जोखिम लेने वाले निवेशकों की पहली पसंद बने हुए हैं। इसके अलावा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड जैसे तरीके भी निवेशकों को पंसद आ रहे हैं, जबकि REITs और InvITs जैसे नए ऑप्शन धीरे-धीरे इनकम-ओरिएंटेड पोर्टफोलियो के लिए ध्यान खींच रहे हैं।

किस तरह निवेश की शुरुआत करें

एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि ज्यादा रिटर्न की चाहत में नुकसान होता है। ज्यादा रिटर्न में आमतौर पर ज्यादा उतार-चढ़ाव भी होता है, खासकर इक्विटी मार्केट में। निवेशकों के लिए शॉर्ट-टर्म मार्केट की चाल का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए लॉन्ग-टर्म गोल को ध्यान में रखकर निवेश करें और फंडामेंटल्स पर ध्यान दें और मार्केट साइकल के दौरान इन्वेस्टेड रहें। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को आमतौर पर समय के साथ लागत को एवरेज करने और मार्केट के उतार-चढ़ाव के असर को कम करने के तरीके के तौर पर बताया जाता है। इसलिए छोटे निवेशक बाजार में सिप के जरिये ही निवेश न करें। निवेश पर बहुत ज्यादा जोखिम न लें। शेयर में सीधे निवेश से बचें। इसके साथ ही पोर्टफोलियो को डायवर्सिफायड करें। स्मॉल सेविंग, बैंक एफडी में भी निवेश जरूर करें। मार्केट में पूरा पैसा लगाने से बचें।

टैक्स देनदारी का ख्याल रखें

निवेश करने से पहले टैक्स देनदारी और छूट का ख्याल रखें। टैक्स एफिशिएंसी इन्वेस्टमेंट प्लानिंग का एक ज़रूरी हिस्सा है। इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS), प्रोविडेंट फंड और कुछ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स जैसे इंस्ट्रूमेंट्स मौजूदा कानूनों के तहत टैक्स बेनिफिट देते हैं, जबकि कैपिटल गेन टैक्सेशन एसेट क्लास और होल्डिंग पीरियड के हिसाब से अलग-अलग होता है।

नए निवेशक इन बातों का रखें ख्याल

नए निवेशक, सबसे पहले फाइनेंशियल लक्ष्य तय करें, इमरजेंसी फंड बनाएं और फिर निवेश शुरू करें। समय-समय पर पोर्टफोलियो को रिव्यू और रीबैलेंसिंग करते रहे। किसी एक प्रोडक्ट को चुनने के बजाय निरंतरता, धैर्य और सोच-समझकर फैसले लेना ज्यादा मायने रखता है। इसलिए लॉन्ग-टर्म को ध्यान में रखकर निवेश करें।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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