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हेल्थ इंश्योरेंस बदलना है? सिर्फ प्रीमियम नहीं, इन 7 चीजों पर करें गौर

हेल्थ इंश्योरेंस बदलते समय सिर्फ कम प्रीमियम देखकर फैसला करना सही नहीं है। नई पॉलिसी में कवरेज, वेटिंग पीरियड, अस्पतालों का नेटवर्क और क्लेम की शर्तें भी देखनी चाहिए। सही तुलना आपको भविष्य में बड़े मेडिकल खर्च से बचा सकती है।

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Health Insurance

आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए काफी जरूरी हो गया है। लेकिन कई बार पुरानी पॉलिसी का प्रीमियम बढ़ जाता है, कवरेज कम लगता है या आपकी जरूरतें बदल जाती हैं। ऐसे में लोग नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के बारे में सोचते हैं। पॉलिसी बदलना यानी Portability करना हो तो सिर्फ कम प्रीमियम देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। नई पॉलिसी की पूरी शर्तों को समझना जरूरी है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं हेल्थ इंश्योरेंस लेते वक्त आपको कौन कौन सी चीजें देखनी चाहिए?

इन बातों को न करें इग्नोर

सबसे पहले कवरेज की राशि देखें। नई पॉलिसी में Sum Insured आपकी जरूरत के हिसाब से पर्याप्त है या नहीं, यह जांचें। अगर परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ गई है या इलाज का खर्च बढ़ रहा है, तो पुरानी पॉलिसी से ज्यादा कवरेज की जरूरत हो सकती है। सिर्फ कम प्रीमियम के चक्कर में कम कवरेज लेना आगे परेशानी पैदा कर सकता है।

दूसरी महत्वपूर्ण चीज वेटिंग पीरियड है। कुछ बीमारियों और पहले से मौजूद बीमारियों के इलाज पर पॉलिसी में तय अवधि तक इंतजार करना पड़ सकता है। पॉलिसी बदलते समय यह समझना जरूरी है कि पुराने प्लान में पूरा किया गया वेटिंग पीरियड नई पॉलिसी में किस सीमा तक मान्य होगा। Portability के नियमों के तहत कुछ क्रेडिट ट्रांसफर हो सकते हैं, लेकिन नई पॉलिसी की शर्तें जरूर पढ़ें।

तीसरी चीज Room Rent और ICU की सीमा है। कुछ पॉलिसियों में अस्पताल के कमरे के किराए पर लिमिट होती है। अगर आप इससे महंगा कमरा लेते हैं, तो कुछ परिस्थितियों में दूसरे अस्पताल खर्चों पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए Room Rent Limit और ICU से जुड़े नियमों को ध्यान से देखें।

चौथी चीज Co-payment और Deductible है। Co-payment में क्लेम की राशि का एक हिस्सा आपको खुद देना पड़ सकता है। वहीं Deductible वह राशि होती है जिसे बीमा कंपनी के भुगतान शुरू होने से पहले पॉलिसी की शर्तों के अनुसार आपको वहन करना पड़ सकता है। कम प्रीमियम वाली पॉलिसी में ऐसी शर्तें हो सकती हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज न करें।

पांचवीं चीज Cashless Hospital Network है। देखें कि आपके शहर और आसपास के इलाके में नई कंपनी के पर्याप्त Cashless Hospitals हैं या नहीं। खासतौर पर उन अस्पतालों को जरूर जांचें जहां आप इलाज करवाना पसंद करते हैं। अस्पतालों का नेटवर्क समय के साथ बदल भी सकता है, इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले ताजा सूची देखना बेहतर है।

छठी चीज Exclusions यानी किन चीजों का कवर नहीं मिलेगा है। हर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कुछ इलाज, प्रक्रियाएं या परिस्थितियां कवर से बाहर हो सकती हैं। पॉलिसी के Exclusions पढ़ने से आपको बाद में क्लेम के समय किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा।

सातवीं और बेहद जरूरी चीज Claim Settlement Process और Customer Service है। कंपनी का क्लेम करने का तरीका, जरूरी दस्तावेज, शिकायत निवारण प्रक्रिया और पॉलिसी की बाकी शर्तों को समझें। सिर्फ विज्ञापन या किसी एजेंट की बात के आधार पर फैसला न करें। पॉलिसी के दस्तावेजों में दी गई शर्तों को प्राथमिकता दें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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