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कैसे RBI के फैसले से खुला Tata का राज, चंद घंटों में ₹17200 करोड़ बढ़ी ग्रुप की वैल्यू

रिजर्व बैंक ने टाटा सन्स का NBFC रजिस्ट्रेशन रद्द करने से इनकार कर दिया है। इसके बाद कंपनी पर लिस्टिंग का दबाव बढ़ गया। इस दबाव ने ऐसा राज खोला, जिससे ग्रुप का वैल्यूएशन चंद घंटों में ₹17200 बढ़ गया।

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टाटा सन्स की लिस्टिंग टाटा ग्रुप के लिए बड़ा ट्रिगर

RBI के एक फैसले ने Tata Group की कुछ कंपनियों के शेयरों में ऐसी तेजी ला दी कि शुरुआती कारोबार के करीब एक घंटे में पांच Tata कंपनियों का मार्केट कैप करीब ₹17,200 करोड़ बढ़ गया। Tata Chemicals तो करीब 20% उछल गया। सवाल यह है कि ऐसी क्या वजह रही, जिसकी वजह से Tata Chemicals से लेकर Tata Investment Corporation, Tata Motors Passenger Vehicles, Tata Elxsi और Tata Technologies ने तेजी दिखाई? सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट और फिनफ्लुएंसर Abhijit Chokshi ने अपने एक एक्स पोस्ट में पूरा मामला समझाया है।

रिजर्व बैंक ने क्या किया

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने Tata Sons की उस एप्लिकेशन को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने अपनी कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) यानी टाटा सन्स का NBFC के तौर पर रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की मांग रखी थी। क्योंकि, इसकी वजह से कंपनी पर अपर लेयर एनबीएफी पर लागू नियमों के तहत शेयर मार्केट में पब्लिक कंपनी के तौर पर लिस्टिंग का दबाव था। RBI की तरफ से आवेदन खारिज किए जाने के बाद कंपनी पर लिस्टिंग का फिर से दबाव बढ़ गया है।

RBI के फैसले से क्याें भागे Tata stocks?

Tata Sons कोई सामान्य प्रावेट होल्डिंग कंपनी नहीं है। बल्कि, इसके पास Tata Group की तमाम लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों में मेजोरिटी हिस्सेदारी है। अगर RBI के फैसले के बाद टाटा सन्स की लिस्टिंग होती है, तो यह उन तमाम निवेशकों के लिए वैल्यू अनलॉकिंग का मौका होगा, जो टाटा सन्स में शेयर होल्डर हैं। यही वह वजह है, जिसने टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में रैली शुरू की है। क्योंकि, अब निवेशकों के सामने यह संभावना पहले से ज्यादा स्पष्ट है कि Tata Sons की लिस्टिंग हो सकती है। इसकी वजह से टाटा ग्रुप की कई कंपनियों को रिवैल्यूएशन का मौका मिलेगा, क्योंकि वे भी टाटा सन्स में हिस्सेदार हैं। यही वजह रही कि रिजर्व बैंक के फैसले के बाद कुछ ही घंटों में टाटा ग्रुप का वैल्यूएशन ₹17,214 करोड़ बढ़ गया।

Tata Chemicals का paradox सबसे दिलचस्प क्यों है?

पूरी कहानी समझने के लिए Tata Chemicals को देखना होगा। Tata Chemicals के पास Tata Sons में करीब 2.53% हिस्सेदारी है। मान लीजिए Tata Sons का वैल्युएशन ₹10 लाख करोड़ है, तो ₹10 लाख करोड़ × 2.53% = ₹25,300 करोड़ यानी Tata Chemicals के पास Tata Sons की हिस्सेदारी की वैल्यू करीब ₹25,300 करोड़ है। जबकि, 15 सितंबर की रैली से पहले Tata Chemicals का मार्केट कैप करीब ₹15,600 करोड़ था। यानी कागज पर Tata Sons की इस एक हिस्सेदारी की वैल्यू Tata Chemicals की पूरी मौजूदा मार्केट वैल्यू से करीब 1.6 गुना ज्यादा है। यही वह वैल्यूएशन गैप है, जिसे लेकर निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई है।

अब तक क्यों इस वैल्यू को डिस्काउंट किया?

किसी होल्डिंग कंपनी के पास अगर दूसरी कंपनियों के शेयर हैं, तो मार्केट अक्सर उन एसेट की पूरी वैल्यू होल्डिंग कंपनी को नहीं देता। इसे होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट कहा जाता है। इसके पीछे कई वजहें होती हैं। मसलन, एसेट की लिक्विडिटी कम होना। ऑनरशिप स्ट्रक्चर, टैक्स, कॉरपोरेट एक्सपेंस, कैपिटल अलोकेशन और इस बात की अनिश्चितमा के शेयर होल्डर के अंडरलायिंग एसेट की वैल्यू को वास्तव में कब और किस कीमत पर अनलॉक कर पाएगा।

कितनी है टाटा सन्स के एसेट क वैल्यू?

अलग-अलग मीडिया और रिसर्च रिपोर्टों में Tata Sons के अंडरलायिंग पोर्टफोलिया की वैल्यू करीब ₹15–16 लाख करोड़ बताई गई है, जबकि संभावित PO वैल्यूएशन करीब ₹9–12.5 लाख करोड़ के बीच हैं। यानी अंडरलायिंग एसेट्स और और संभावित मार्केट वैल्यूएशन के बीच बड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए Tata Sons की लिस्टिंग अपने आप में वैल्यू क्रिएशन की गारंटी नहीं है।

Tata कंपनियों की लगभग 12% हिस्सेदारी का खेल

Tata Sons में सिर्फ Tata Trusts या Shapoorji Pallonji Group की ही हिस्सेदारी नहीं है। Tata Group की कई लिस्टेड कंपनियां भी Tata टाटा सन्स की शेयरहोल्डर हैं।अलग-अलग रिपोर्ट्स में टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियेां की कुल हिस्सेदारी करीब 12–13% के आसपास बताई गई है।अगर Tata Sons का वैल्यूएशन ₹10 लाख करोड़ मानें और हिस्सेदारी 12.1% लें, तो इन कंपनियों की हिस्सेदारी की वैल्यू करीब ₹10 लाख करोड़ × 12.1% = ₹1.21 लाख करोड़ बनती है। यही वजह है कि Tata Sons की संभावित लिस्टिंग सिर्फ Tata Sons की कहानी नहीं है। यह लिस्टेड टाटा कंपनियों के शेयरहोल्डर्स के लिए भी रिवैल्यूएशन इवेंट बन सकती है।

सब कुछ रिस्क फ्री नहीं

टाटा ग्रुप के रिवैल्यूएशन की उम्मीद के साथ दूसरी तरफ रिस्क भी उतना ही बड़ा है चोकशी के मुताबिक इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है। Tata Sons की लिस्टिंग को लेकर जितनी तेजी से उम्मीद बढ़ी है, उतनी ही तेजी से सेंटिमेंट पलट भी सकता है। क्योंकि, अब भी Tata Sons के पास RBI के फैसले को कोर्ट में चुनौती देने का मौका है। यानी बाजार का यह मूव सिर्फ फंडामेंटल अर्निंग पर आधारित नहीं है। इसमें रेगुलेटरी एक्शन भी अहम है।

Shapoorji Pallonji के लिए क्यों अहम है?

Shapoorji Pallonji Group के पास Tata Sons में करीब 18.37% हिस्सेदारी है। यह हिस्सा लंबे समय से SP Group की सबसे बड़ी फाइनेंशियल एसेट्स में से एक माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक SP Group अपनी Tata Sons holding के एक हिस्से को मॉनेटाइज करके करीब ₹25,000 करोड़ जुटाने की संभावनाएं तलाश रहा है। ऐसे में Tata Sons की लिस्टिंग उसके लिए सिर्फ वैल्यूएशन इवेंट नहीं होगी। बल्कि, नई लिक्विडिटी भी मिल सकती है।

आज क्या हुआ?

17 सितंबर को Tata Sons की बोर्ड मीटिंग हो रही है। लिस्टिंग से लेकर लीडरशिप तक तमाम मुद्दों पर इस मीटिंग में चर्चा होनी है। टाटा ग्रुप के स्टॉक्स टाटा सन्स की लिस्टिंग का फायदा ले पाएंगे या नहीं यह बोर्ड के फैसले पर निर्भर करता है।

एक्सपर्ट व्यू: यह आर्टिकल सेबी रजिस्टटर्ड Abhijit Chokshi की तरफ से सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में दी गई जानकारी पर आधारित है। यह निवेश सलाह नहीं है। इसका मकसद सिर्फ जानकारी देना है। निवेश का अपने निवेश सलाहकार की सलाह के आधार पर करें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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