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Vodafone-Idea को AGR पर बड़ी राहत, 15% लुढ़क गया शेयर; पॉजिटिव खबर फिर भी क्यों टूटा शेयर?

Vodafone-idea को केंद्र सरकार ने AGR के मामले में नए वर्ष का तोहफा दिया है। सुप्रीम कोर्ट से मिले निर्देंशों के आधार पर केंद्र सरकार ने देश की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी को AGR बकाया को लेकर बड़ी राहत दी है। केंद्र सरकार की तरफ से Vi को AGR बकाये के लिए पांच साल का मोरेटोरियम ऑफर किया गया है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि पॉजिटिव खबर आने के बाद भी शेयर में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

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शेयर में बड़ी गिरावट (इमेज क्रेडिट, कैन्वा)

कर्ज में डूबी टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea Ltd के शेयरों में बुधवार 31 दिसंबर को तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिन की शुरुआत में AGR राहत पैकेज को लेकर शेयर में करीब 5 फीसदी की तेजी देखने को मिली, लेकिन दोपहर बाद जैसे ही यह जानकारी सामने आई कि केंद्र सरकार ने कंपनी को AGR बकाया को चुकाने के मामले में राहत दी है, शेयर दिनभर की तेजी को पीछे छोड़ते हुए 15 फीसदी नीचे गिर गया।

5 साल का AGR मोरेटोरियम, बड़ी राहत

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय कैबिनेट ने Vodafone Idea के लिए AGR भुगतान पर 5 साल के मोरेटोरियम को मंजूरी दी है। इसके तहत कंपनी के कुल ₹87,695 करोड़ के AGR बकाया को फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है। यह फैसला कंपनी की कमजोर बैलेंस शीट के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

FY32–FY41 में होगा AGR का पुनर्भुगतान

रिपोर्ट के मुताबिक फ्रीज किए गए AGR बकाया के भुगतान को अब वित्त वर्ष 2032 से 2041 के बीच रीशेड्यूल किया जाएगा। वहीं, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (DoT) ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर इन बकायों का दोबारा आकलन करेगा। हालांकि, वित्त वर्ष 2018 और 2019 से जुड़े AGR बकाया कंपनी को अगले पांच वर्षों में चुकाने होंगे।

शेयर क्यों टूटा, जब खबर पॉजिटिव थी?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि AGR राहत की खबर पहले ही शेयर में रैली के जरिए डिस्काउंट हो चुकी थी। ऐसे में जब आधिकारिक संकेत आए, निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसके साथ ही, कंपनी की लंबी अवधि की फंडिंग जरूरतें और नेटवर्क निवेश को लेकर अनिश्चितता अब भी निवेशकों की चिंता बनी हुई है। AGR मोरेटोरियम से Vodafone Idea को सांस लेने का वक्त जरूर मिला है, लेकिन लंबी अवधि में कंपनी की रिकवरी उसके कैश फ्लो, ARPU ग्रोथ और नए निवेश पर निर्भर करेगी।

डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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