Vijay Mallya: ब्रिटेन में भारतीय बैंकों द्वारा दिवालिया कार्यवाही का सामना कर रहे विजय माल्या ने चिंता जाहिर की है कि भारत की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में दिए गए बयान के बाद ये कानूनी कार्रवाइयाँ “अनरियल क्वालिटी” वाली हो गई हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार माल्या ने अब अपनी नई कानूनी टीम को अपने दिवालिया आदेश को रद्द करने का निर्देश दिया है, जो इस हफ्ते लंदन में उच्च न्यायालय में सामने पेश किया गया।
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समझिए पूरा मामला
यह मामला भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की लीडरशिप में बैंकों के एक समूह से जुड़ी अपीलों से जुड़ा है, जिसमें माल्या की बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस द्वारा बकाया करीब 1.05 बिलियन पाउंड (11490 करोड़ रु) को चुकाने की मांग की गई है।
न्यायमूर्ति एंथनी मान की अध्यक्षता में उच्च न्यायालय ने इन कार्यवाहियों से संबंधित दलीलें सुनीं, जिस पर बाद में निर्णय आने की उम्मीद है।
कितनी हो चुकी वसूली
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार माल्या की हाल ही में नियुक्त कानूनी टीम, जैवाला एंड कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर लेह क्रेस्टोहल ने पीटीआई से बात करते हुए इस बात पर जोर दिया कि माल्या का मानना है कि दिवालिया कार्यवाही वास्तविकता से बहुत दूर जा रही है।
क्रेस्टोहल ने दिसंबर 2024 में वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा दिए गए एक बयान की ओर इशारा किया, जिसमें उन्होंने पुष्टि की थी कि भारतीय बैंकों ने माल्या से 14,131.6 करोड़ रुपये वसूल कर लिए हैं, जो माल्या की बकाया राशि से अधिक है।
पूरी तरह चुका दिया लोन
क्रेस्टोहल ने तर्क दिया कि यह एक नया साक्ष्य है, जिससे पता चलता है कि कर्ज पूरी तरह चुका दिया गया था और उम्मीद से अधिक था। ये फैक्ट माल्या के खिलाफ दिवालिया आदेश को रद्द करने को सही साबित करता है।
