Vedanta ED Raid : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) से जुड़े मामले में मशहूर उद्योगपति अनिल अग्रवाल की मल्टीनेशनल माइनिंग कंपनी वेदांता ग्रुप के ठिकानों पर तलाशी की कार्रवाई की है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक तलाशी की यह कार्रवाई सोमवार 1 जून से चल रही है। फिलहाल, ED की तरफ से इस कार्रवाई के बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। हालांकि, कंपनी ने रेड की पुष्टि करते हुए कहा है कि जांच एजेंसी का पूरा सहयोग किया जा रहा है।
रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि सेंट्रल एजेंसी ने FEMA एक्ट के तहत मल्टीनेशनल माइनिंग कंपनी के खिलाफ जांच शुरू की, जिसके बाद यह तलाशी शुरू हुई। वेदांता के खिलाफ यह जांच लगभग एक महीने बाद हुई है, जब कंपनी ने अपने सिक्योर्ड क्रेडिटर्स से 6 अलग-अलग कंपनियों में बंटने के बड़े डीमर्जर प्लान के लिए मंजूरी ले ली थी।
ED FEMA के तहत कब काम करता है?
ED FEMA के तहत तब काम करता है, जब उसे किसी व्यक्ति या कंपनी की तरफ से फॉरेन करेंसी ट्रांजैक्शन में उल्लंघन का शक होता है। इसमें ज्यादातर ऐसे मामले शामिल होते हैं, जो गैर-कानूनी तरीके से पैसा ट्रांसफर करने, विदेश में गैर-कानूनी तरीके से संपत्ति खरीदने, या फॉरेन इन्वेस्टमेंट से जुड़े नियमों के अनुपालन से जुड़े होते हैं।
क्या वेदांता ने इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे?
खास बात यह है कि वेदांता ने ₹400 करोड़ से ज्यादा के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे, जो अब बैन हैं। इसमें से BJP सबसे बड़ी बेनिफिशियरी बनकर उभरी, जिसे लगभग ₹230 करोड़ मिले। इसके अलावा कांग्रेस को लगभग ₹125 करोड़, नवीन पटनायक की बीजू जनता दल को ₹40 करोड़, झारखंड मुक्ति मोर्चा को ₹5 करोड़ और तृणमूल कांग्रेस को लगभग ₹20 लाख का डोनेशन दिया गया।
वेदांता से जुड़े विवाद
वेदांता समूह का नाम कई विवादों में रहा है। अप्रैल 2026 में, छत्तीसगढ़ के एक पावर प्लांट में बॉयलर फटने से 20 से ज्यादा वर्कर की मौत के बाद अनिल अग्रवाल समेत टॉप लीडरशिप के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। पिछले महीने, बुर्ला इरिगेशन डिवीजन ने ओडिशा में भेडन नदी से बिना इजाजत पानी उठाने के लिए वेदांता एल्युमिनियम पर ₹233.11 करोड़ का जुर्माना लगाया था।
