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पति और पत्नी दोनों की आ रही Salary? अलग-अलग कमाई होने पर ऐसे संभालें घर का बजट

Money Tips for Working Couples: अगर पति और पत्नी दोनों वर्किंग हैं और कमा रहे हैं तो दोनों की मंथली सैलरी को मैनेज किया जाना बेहद जरूरी है।

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पति-पत्नी अपनी सैलरी को ऐसे करें मैनेज (Photo: iStock)

Money Tips for Working Couples: आज के समय में पति और पत्नी दोनों का नौकरी करना आम बात है। दोनों की अपनी-अपनी कमाई होती है और इससे परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है। लेकिन जब घर में दो लोगों की सैलरी आती है, तो एक सवाल अक्सर सामने आता है कि आखिर दोनों अपनी कमाई को किस तरह मैनेज करें? घर का खर्च कौन उठाए, बचत कितनी हो और व्यक्तिगत खर्च के लिए कितने पैसे रखें? अगर शुरुआत से पैसों को लेकर स्पष्ट नियम बना लिए जाएं, तो न केवल घर के खर्च आसानी से मैनेज किए जा सकते हैं, बल्कि पैसों को लेकर होने वाले विवाद से भी बचा जा सकता है।

दोनों की सैलरी का हिसाब करें

मंथली बजट बनाने से पहले पति-पत्नी को अपनी-अपनी नेट सैलरी का हिसाब करना चाहिए। इसके बाद घर के सभी जरूरी खर्चों की एक लिस्ट बनाएं। इसमें किराया या होम लोन EMI, राशन, बिजली-पानी का बिल, बच्चों की फीस, इंश्योरेंस, यात्रा और दूसरे जरूरी खर्च शामिल किए जा सकते हैं।

इसके बाद यह तय करें कि हर महीने घर चलाने के लिए कुल कितने पैसे की जरूरत है। इससे दोनों को यह समझने में आसानी होगी कि उनकी आय का कितना हिस्सा घर के लिए जाना चाहिए।

खर्च बराबर नहीं, आय के हिसाब से हो

जरूरी नहीं कि पति-पत्नी दोनों घर के खर्च में बिल्कुल बराबर रकम दें। अगर दोनों की सैलरी अलग-अलग है, तो योगदान भी आय के अनुपात में रखा जा सकता है।

उदाहरण के लिए अगर पति की सैलरी 60 हजार रुपये और पत्नी की सैलरी 40 हजार रुपये है तो कुल आय 1 लाख रुपये हुई। अगर घर का जरूरी खर्च 40 हजार रुपये है, तो दोनों अपनी आय के अनुपात में योगदान कर सकते हैं। इससे एक व्यक्ति पर ज्यादा आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा। वहीं, अगर दोनों की सैलरी लगभग बराबर है, तो घर के जरूरी खर्च को 50-50 के अनुपात में बांटना भी आसान तरीका हो सकता है।

एक जॉइंट फंड बनाना हो सकता है आसान

पति-पत्नी चाहें तो हर महीने अपनी सैलरी का एक तय हिस्सा एक कॉमन अकाउंट या कॉमन फंड में रख सकते हैं। इसी पैसे से घर के जरूरी खर्च, EMI, बिल और दूसरे साझा खर्च किए जा सकते हैं। इसका फायदा यह है कि हर महीने यह तय करने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि कौन सा बिल कौन भरेगा। दोनों पहले से तय रकम जमा कर सकते हैं और साझा खर्च उसी फंड से चलाया जा सकता है।

बचत को खर्च के बाद नहीं, पहले रखें

महीने के अंत में जो पैसा बच जाए, उसे सेव करने की बजाय सैलरी आते ही बचत और निवेश के लिए रकम अलग करना बेहतर हो सकता है। इसके अलावा, रिश्ते में आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि पति और पत्नी के पास कुछ पैसा ऐसा भी हो, जिसे वे अपनी पसंद के अनुसार खर्च कर सकें। इसे व्यक्तिगत खर्च का बजट माना जा सकता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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