FII and DII Inflow : अगर आपको लग रहा है कि सिर्फ विदेशी निवेशक (FII) ही भारतीय शेयर बाजार से दूरी बना रहे हैं, तो अब एक और संकेत सामने आया है। जुलाई में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी भी 16 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या घरेलू निवेशकों का भरोसा भी बाजार से उठने लगा है या फिर इसके पीछे कोई दूसरी कहानी है?
दरअसल, बाजार छोड़ने की बजाय DII ने अपना फोकस बदल दिया है। पैसा अब शेयर बाजार के बजाय आईपीओ (IPO) और क्यूआईपी (QIP) जैसे प्राइमरी मार्केट की ओर जाता दिखाई दे रहा है। साथ ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और कंपनियों के तिमाही नतीजों ने भी फंड मैनेजरों को फिलहाल सतर्क कर दिया है।
16 महीने के निचले स्तर पर पहुंची DII खरीदारी
एनएसई के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक, 23 जुलाई तक डीआईआई ने भारतीय शेयर बाजार में केवल 24,500 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। महीने में अभी छह कारोबारी सत्र बाकी हैं, लेकिन मौजूदा रफ्तार के आधार पर यह अप्रैल 2025 के बाद सबसे कमजोर मासिक खरीदारी मानी जा रही है।
| महीना | DII खरीदारी |
|---|---|
| मई | 82,669 करोड़ रुपये |
| जून | 85,800 करोड़ रुपये |
| जुलाई (23 जुलाई तक) | 24,500 करोड़ रुपये |
हालांकि, पूरे 2026 में DII ने अब तक करीब 4.81 लाख करोड़ रुपये का निवेश भारतीय शेयर बाजार में कर चुके हैं। यानी लंबी अवधि का भरोसा बरकरार है, लेकिन फिलहाल निवेश की रणनीति बदल गई है।
FII बेच रहे, DII भी धीमे... बाजार को कौन संभालेगा?
पिछले कुछ महीनों से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। ऐसे में बाजार को सहारा देने का काम घरेलू संस्थागत निवेशक कर रहे थे। लेकिन जुलाई में उनकी खरीदारी भी काफी धीमी पड़ गई है। इसका असर बाजार की चाल पर भी दिख रहा है। जुलाई में अब तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लगभग 0.1 फीसदी फिसल चुके हैं। लगातार चार कारोबारी सत्रों तक दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए हैं।
आखिर कहां जा रहा है पैसा?
यही सबसे बड़ा सवाल है। असल में इस महीने प्राइमरी मार्केट में रिकॉर्ड स्तर की फंड जुटाने की गतिविधियां देखने को मिली हैं। जुलाई में अब तक 17,283 करोड़ रुपये के 9 IPO आए। इसके अलावा 6 कंपनियों ने QIP के जरिये 20,800 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यानी IPO और QIP के जरिये करीब 38,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की पूंजी बाजार से जुटाई गई। इन इश्यू में DII ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसका सीधा असर सेकेंडरी मार्केट में उनकी खरीदारी पर पड़ा।
कोटक एएमसी ने दी बड़ी वजह
कोटक महिंद्रा एएमसी के प्रबंध निदेशक निलेश शाह का कहना है कि एक महीने की खरीदारी देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि DII बाजार से बाहर निकल रहे हैं।
उनके मुताबिक इस महीने निवेश के बेहतर अवसर प्राइमरी मार्केट में मिले हैं। इसलिए फंड मैनेजरों ने वहां पूंजी लगाई है। निवेश हमेशा वहीं जाता है जहां बेहतर वैल्यू और अवसर दिखाई देते हैं।
म्यूचुअल फंड भी क्यों हुए सतर्क?
सेबी के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में म्यूचुअल फंड्स ने करीब 11,769 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। यह फरवरी 2026 के बाद सबसे कम खरीदारी है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में एसआईपी के जरिए आने वाला पैसा अभी भी मजबूत बना हुआ है। यानी खुदरा निवेशकों की तरफ से कोई घबराहट नहीं दिख रही।
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