Iran War Insider Trading Oil: ईरान संकट के बीच ग्लोबल मार्केट में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ऑयल और इक्विटी फ्यूचर्स में संदिग्ध ट्रेडिंग को लेकर अमेरिकी सांसद रिची टोरेस (Ritchie Torres) ने जांच की मांग की है। टोरेस का अरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने जब सीजफायर का ऐलान किया, तो उससे ठीक पहले ऑयल और इक्विटी फ्यूचर्स मार्केट में संदिग्ध ट्रेड देखने को मिले हैं।
फैसले से पहले अचानक बढ़ी ट्रेडिंग
ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई टालने के ऐलान से ठीक पहले फ्यूचर्स मार्केट में असामान्य गतिविधि देखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, अरबों डॉलर के सौदे बेहद कम समय में हुए, जिसने बाजार में शक पैदा कर दिया है। यह गतिविधि उस समय हुई जब निवेशक युद्ध के जोखिम को लेकर पहले से ही सतर्क थे।
दो मिनट में 60 लाख बैरल क्रूड का सौदा
टोरेस के दावे के मुताबिक न्यूयॉर्क में सुबह करीब 6:49 बजे सिर्फ दो मिनट के भीतर करीब 60 लाख बैरल तेल से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट्स बेचे गए। सामान्य तौर पर पिछले पांच दिनों में इसी समयावधि में औसतन सिर्फ 7 लाख बैरल के सौदे होते थे। इस असामान्य उछाल ने संभावित इनसाइडर एक्टिविटी की आशंका को जन्म दिया है।
SEC और CFTC से जांच की मांग
रिची टोरेस ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) और कमोडिटी फ्यूचर ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) को पत्र लिखकर औपचारिक जांच शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि ट्रेडिंग की गति, पैमाना और संरचना बेहद संदिग्ध है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
ट्रंप के फैसले से पहले टाइमिंग पर सवाल
यह पूरी ट्रेडिंग उस समय हुई जब ट्रंप ने ईरान पर बहुत बड़े हमले की चेतावनी देने के बाद आखिरी वक्त में उसे टाल दिया और सीजफायर का ऐलान कर दिया। खास बात यह है कि ट्रेडिंग स्पाइक और फैसले के ऐलान के बीच का समय बेहद कम था, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ ट्रेडर्स को पहले से जानकारी थी।
रेगुलेटर्स की प्रतिक्रिया सतर्क
SEC ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है, जबकि CFTC ने कहा है कि वह बाजार गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि औपचारिक जांच शुरू की गई है या नहीं। अगर इस मामले में जांच आगे बढ़ती है, तो यह ग्लोबल कमोडिटी और फाइनेंशियल मार्केट्स के लिए बड़ा मामला बन सकता है। इससे न सिर्फ ट्रेडिंग पारदर्शिता पर सवाल उठेंगे, बल्कि जियोपॉलिटिकल घटनाओं के दौरान बाजार की निष्पक्षता पर भी बहस तेज हो सकती है।
