बिजनेस

अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में 'आग', 50 फीसदी तक हो गया महंगा

ईरान पर लगे इन कड़े प्रतिबंधों के कारण दुनिया भर सहित अमेरिकी जनता अब ईंधन की आसमान छूती कीमतों और भारी महंगाई झेल रही है। अमेरिका में गैसोलिन (पेट्रोल) की कीमतें $4.50 प्रति गैलन के स्तर को पार कर गई हैं।

Image

petrol diesel

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, अमेरिका, इस समय एक गंभीर ऊर्जा संकट (Energy Crisis) से जूझ रही है। ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच अमेरिकी पंपों पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने आसमान छू लिया है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका में गैसोलिन (Petrol) की कीमतें $4.50 प्रति गैलन के स्तर को पार कर गई हैं, जो इसके अब तक के उच्चतम स्तर (All-Time High) के बेहद करीब है। पिछले कुछ हफ्तों के भीतर ही कीमतों में 50 फीसदी तक का भारी उछाल देखा गया है, जिसने अमेरिकी नागरिकों के बजट को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है।

ईरान से लड़ाई पड़ रही भारी

ईंधन की कीमतों में इस बेतहाशा बढ़ोतरी की मुख्य वजह ईरान के साथ जारी संघर्ष को माना जा रहा है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल की आवाजाही में हो रही बाधा ने वैश्विक बाजार को डरा दिया है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। युद्ध की स्थिति के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति (Global Oil Supply) में भारी कमी आई है। इसी सप्लाई क्रंच का सीधा असर अमेरिका के घरेलू बाजारों पर पड़ा है, जहाँ मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है।

आम जनता पर महंगाई की दोहरी मार

अमेरिका में ईंधन की कीमतें बढ़ना केवल वाहन चलाने वालों के लिए ही चिंता की बात नहीं है, बल्कि यह पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित कर रही है। जब डीजल और पेट्रोल महंगा होता है, तो माल ढुलाई (Logistics) की लागत बढ़ जाती है, जिससे फल, सब्जियां और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम भी बढ़ जाते हैं। अमेरिकी उपभोक्ता जो पहले से ही मुद्रास्फीति (Inflation) से लड़ रहे थे, उनके लिए 50 फीसदी तक महंगा पेट्रोल एक बड़ा आर्थिक झटका साबित हो रहा है। कई शहरों में लोग ईंधन बचाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का सहारा ले रहे हैं या अपनी यात्राओं में कटौती कर रहे हैं।

और बढ़ सकती है कीमत

ईंधन की इन बढ़ती कीमतों ने अमेरिका के भीतर राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ा दी है। विपक्षी दल इसे मौजूदा नीतियों की विफलता बता रहे हैं, जबकि प्रशासन का तर्क है कि यह एक वैश्विक संकट है जिसे बाहरी युद्ध प्रभावित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान के साथ तनाव जल्द ही कम नहीं हुआ और होर्मुज का रास्ता सुचारू रूप से नहीं खुला, तो कच्चा तेल $150 प्रति बैरल के पार जा सकता है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी गैस की कीमतें $5.00 प्रति गैलन के ऐतिहासिक आंकड़े को भी पार कर सकती हैं, जो वैश्विक मंदी का कारण बन सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article