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शहरी सहकारी बैंकों के लिए RBI ने बदले नियम, लगातार इतने साल तक ही रह पाएंगे डायरेक्टर

Urban Cooperative Banks New Rules:आरबीआई ने यूसीबी निदेशकों का कार्यकाल 10 साल तक सीमित किया और 3 साल का कूलिंग-ऑफ अनिवार्य किया है, ताकि पारदर्शिता बढ़े और लंबे समय तक पद पर बने रहने पर रोक लगे।

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आरबीआई ने बदले यूसीबी निदेशकों के नियम (तस्वीर-istock/PTI)

Urban Cooperative Banks New Rules : भारतीय रिजर्व बैंक ने शहरी सहकारी बैंकों (UCB) के निदेशकों के कार्यकाल को लेकर बड़े बदलाव किए हैं। केंद्रीय बैंक ने नए संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए साफ कहा है कि अब कोई भी व्यक्ति किसी शहरी सहकारी बैंक के निदेशक मंडल में लगातार 10 साल से अधिक समय तक निदेशक नहीं रह सकेगा। यह नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। आरबीआई का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य सहकारी बैंकों में बेहतर प्रशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

10 साल बाद लेना होगा तीन साल का ब्रेक

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा आरबीआई द्वारा जारी नए नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी यूसीबी के बोर्ड में लगातार 10 साल तक डायरेक्टर के रूप में काम कर चुका है, तो उसे उसके बाद कम से कम तीन साल का अनिवार्य कूलिंग-ऑफ पीरियड पूरा करना होगा। इस दौरान वह उसी बैंक के बोर्ड में दोबारा नियुक्त या निर्वाचित नहीं हो सकेगा। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि तीन साल की यह अवधि पूरी होने के बाद ही संबंधित व्यक्ति दोबारा निदेशक बनने के लिए पात्र माना जाएगा। आरबीआई का मानना है कि इससे लंबे समय तक एक ही समूह या व्यक्ति का बैंक के संचालन पर प्रभाव कम होगा और नए लोगों को नेतृत्व का मौका मिलेगा।

नियमों का गलत फायदा उठाने के मामले आए सामने

आरबीआई ने अपने बयान में कहा कि उसके सामने ऐसे कई मामले आए थे, जिनमें कुछ निदेशक कानूनी प्रावधानों को दरकिनार कर लंबे समय तक बोर्ड में बने रहने की कोशिश कर रहे थे। कई लोग बीच में इस्तीफा देकर कुछ समय बाद फिर से चुनाव लड़ लेते थे या सह-नामित होकर दोबारा निदेशक बन जाते थे। इस तरीके से वे निर्धारित अवधि से अधिक समय तक बैंक के बोर्ड में बने रहते थे। केंद्रीय बैंक ने कहा कि यह व्यवस्था सहकारी बैंकों में स्वस्थ प्रशासन और जवाबदेही की भावना के खिलाफ थी। इसी वजह से नियमों को और सख्त बनाने का फैसला लिया गया।

कूलिंग-ऑफ अवधि में बैंक से नहीं रहेगा जुड़ाव

नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, तीन साल की कूलिंग-ऑफ अवधि के दौरान संबंधित व्यक्ति बैंक के प्रबंधन या संचालन से किसी भी रूप में जुड़ा नहीं रहेगा। वह बैंक में केवल एक सामान्य सदस्य या ग्राहक के रूप में ही बना रह सकता है। यानी इस अवधि में वह किसी भी प्रशासनिक, सलाहकार या प्रभावशाली भूमिका में नहीं रह सकेगा। आरबीआई का कहना है कि इससे बैंक के संचालन में निष्पक्षता बनी रहेगी और किसी एक व्यक्ति का लगातार प्रभाव खत्म होगा।

दूसरे बैंक में निदेशक बनने की छूट

हालांकि, आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति पात्रता की शर्तें पूरी करता है, तो वह अपनी कूलिंग-ऑफ अवधि के दौरान किसी दूसरे सहकारी बैंक के बोर्ड में निदेशक बन सकता है। यानी प्रतिबंध केवल उसी बैंक पर लागू होगा, जहां उसने लगातार 10 साल तक सेवा दी है। इस प्रावधान को इसलिए रखा गया है ताकि अनुभवी लोगों का ज्ञान और अनुभव बैंकिंग क्षेत्र में उपयोग होता रहे, लेकिन किसी एक बैंक में लंबे समय तक नियंत्रण की स्थिति न बने।

तत्काल प्रभाव से लागू हुए नए दिशा-निर्देश

आरबीआई ने बताया कि शहरी सहकारी बैंक (शासन) संशोधन दिशा-निर्देश, 2026 को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। यानी अब सभी शहरी सहकारी बैंकों को इन नियमों का पालन करना होगा। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि इसी तरह के दिशा-निर्देश ग्रामीण सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के लिए भी अलग से जारी किए गए हैं। इससे पूरे सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में प्रशासनिक सुधार लाने की कोशिश की जा रही है।

बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश

एक्सपर्ट्स का मानना है कि आरबीआई का यह कदम सहकारी बैंकों में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर प्रशासन को मजबूत करेगा। लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के बोर्ड में बने रहने से कई बार निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होती है और हितों के टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। नए नियम लागू होने के बाद सहकारी बैंकों में नेतृत्व परिवर्तन को बढ़ावा मिलेगा और नए लोगों को जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिलेगा। इससे बैंकिंग व्यवस्था अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनने की उम्मीद जताई जा रही है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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