महंगे होते इलाज खर्च के कारण हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की मांग तेजी से बढ़ी है। हालांकि, इसके साथ ही क्लेम रिजेक्ट की तदाद भी बढ़ी है। इसकी वजह पॉलिसी लेते समय हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के डॉक्यूमेंट को सही से नहीं पढ़ना और एजेंट की बातों पर विश्वास करना है। बहुत सारे लोगा पॉलिसी लेकर भूल जाते हैं। जब कोई मेडिकल इमरजेंसी होती है तो पॉलिसी की याद आती है। हालांकि, उस वक्त कई लोगों को झटका लगता है जब बीमा कंपनी उनका क्लेम रिजेक्ट कर देती है। आखिर क्यों क्लेम रिजेक्ट होता है? पॉलिसी में डिडक्टिबल्स का नया खेल क्या है? आइए आपको पूरी बात समझाते हैं और इससे बचने के तरीके भी बताते हैं।
पॉलिसी डॉक्यूमेंट सावधानी से पढ़ें
इंश्योरेंस एक्सपर्ट का कहना है कि लोग सबसे बड़ी गलती करते हैं कि वो Health Insurance Policy डॉक्यूमेंट को अच्छे से नहीं पढ़ते हैं। अगर वो पढ़ें तो बाद की परेशानी से बच सकते हैं। बता दें कि हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी आपके और आपकी इंश्योरेंस कंपनी के बीच एक आधिकारिक समझौता होता है। इसमें साफ तौर पर बताया जाता है कि क्या-क्या कवर किया गया है, क्या कवर नहीं है, और किन शर्तों पर आप क्लेम कर सकते हैं। यह इंश्योरेंस पॉलिसी को समझने के लिए एक जरूरी गाइड है लेकिन बहुत सारे लोग इसे पढ़ना जरूरी नहीं समझते हैं। जो ऐसा करते हैं वो बाद में परेशान होते हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी डॉक्यूमेंट पढ़ने से मेडिकल इमरजेंसी के समय अचानक आने वाली मुश्किलों से बच सकते हैं। इसमें साफ लिखा होता है कि कौन बीमारी कवर है और कौन नहीं? कवर में क्या शर्तें लागू होंगी और कहां आपको अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।
पॉलिसी लेने के बाद कैंसिल करने की आजादी
जानकारों का कहना हे कि कोई भी बीमा कंपनी से पॉलिसी खरीदने के बाद आप 15 से 30 दिन के भीतर उसे कैंसिल कर सकते हैं। इंश्योरेंस कंपनी आमतौर पर 15 से 30 दिनों का 'फ्री-लुक पीरियड' देती है। इस दौरान आप पॉलिसी के दस्तावेज को ध्यान से पढ़ सकते हैं, सभी शर्तों को समझ सकते हैं और अगर आपको कुछ ठीक न लगे, तो पॉलिसी कैंसिल भी कर सकते हैं।
डिडक्टिबल (deductible) क्या है?
बहुत सारी कंपनियां कम प्रीमियम के लिए आज के समय में डिडक्टिबल ऑफर कर रही है। आखिर यह है क्या? डिडक्टिबल वह रकम है जिसे आप बीमारी के दौरान अपनी जेब से देने के लिए सहमत होते हैं, इससे पहले कि आपका इंश्योरेंस पेमेंट करना शुरू करे। ऐसे समझते हैं कि अगर आपका डिडक्टिबल ₹50,000 है और आपका हॉस्पिटल का बिल ₹2,00,000 है तो आप ₹50,000 देते हैं और इंश्योरेंस कंपनी ₹150,000 देती है।
